Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर चतुर्ग्रही योग का निर्माण, जानें पूजा का शुभ समय

जबलपुर। महाशिवरात्रि पर कई दुर्लभ महासंयोग बन रहे हैं, जो इस बात का संकेत है कि भोलेनाथ अपने भक्तों पर अपनी कृपा की वर्षा करने वाले हैं। पंडित सौरभ दुबे के अनुसार 48 बर्षो के बाद रविवार, 15 फरवरी 2026 को महाशिवरात्रि पर उत्तराषाढ़ा एवं श्रवण नक्षत्र का संयोग बन रहा है। श्रवण नक्षत्र शाम 6:43 से रात्रिपर्यंत तक प्रभावी रहेगा। इस दिन सूर्य, बुध, शुक्र और राहु तीनों कुंभ राशि में विराजमान होंगे। ऐसे में बुधादित्य योग, त्रिग्रही योग एवं चतुर्ग्रही योग का निर्माण हो रहा है। जो कई राशियों के लिए शुभ साबित होगा, सर्वार्थ सिद्धि योग से भी महाशिवरात्रि पर सुखद संयोग बन रहा है।

पंडित सौरभ दुबे के अनुसार महाशिवरात्रि पर शिव योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, प्रीति योग, आयुष्मान योग, सौभाग्य योग, शोभन योग, साध्य योग, शुक्ल योग, ध्रुव योग, व्यतिपात और वरियान योग भी बन रहा है।

ज्योतिषाचार्य पंडित सौरभ दुबे के अनुसार महाशिवरात्रि रविवार को उत्तराषाढ़ा एवं श्रवण नक्षत्र मकर राशि होने से जहां शनि का संयोग बना है वहीं इस महाशिवरात्रि पर मध्यरात्रि में भगवान शिव के सिर पर विराजित चंद्रमा शनि की राशि में आकर शनि और सूर्य के साथ मिलकर भोलेनाथ के माथे पर विराजित त्रिपुंड चंदन जैसा त्रिग्रही योग बनाएंगे। महाशिवरात्रि पर इस योग का बनना बेहद दुर्लभ संयोग है।

48 सालों बाद बना ये खास योग

महाशिवरात्रि पर चतुर्ग्रही योग का निर्माण महायोग बना रहा है। ऐसा अद्भुत संयोग करीब 48 साल बाद बन रहा है। इस दिन त्रयोदशी और चतुर्दशी दोनों तिथियां हैं। मान्यता है कि इस दिन किसी कार्य की शुरुआत करना व खरीदारी करना अति उत्तम होता है। इसका विशेष फल प्राप्त होता है।

बेलपत्र का विशेष महत्व

शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव को बेलपत्र अति प्रिय है। इसलिए कहा जाता है कि महाशिवरात्रि के दिन जलाभिषेक करने के साथ बेलपत्र चढ़ाने से शिव जी अति प्रसन्न हो जाते हैं और आशीर्वाद देते हैं। इस दिन भक्तगण भगवान शिव का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक करने के साथ धूतरा, बेलपत्र सहित कई चीजें अर्पित करते हैं। लेकिन इन सभी चीजों में बेलपत्र भगवान शिव को अति प्रिय है। इसे बिल्वपत्र भी कहा जाता है।

पूजा के शुभ समय

फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि का प्रारंभ

रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय
शाम 06:19 – रात 09:26

रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय
रात 09:26 – प्रात: 12:34, 16 फरवरी

रात्रि तृतीया प्रहर पूजा समय
प्रात: 12:34 – प्रात: 03:41, 16 फरवरी

रात्रि चतुर्थी प्रहर पूजा समय
प्रात: 03:41 – प्रात: 06:48, 16 फरवरी

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