नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटते ही दतिया में सियासी भूचाल, समर्थकों के इस्तीफे और हाईवे जाम से बढ़ा दबाव

मध्‍यप्रदेश में दतिया में उपचुनाव राजनीतिक सरगर्मी बन गया है। भाजपा ने वरिष्‍ठ नेता नरोत्‍तम मिश्रा का टिकट काटकर आरएसएस के करीबी आशुतोष को टिकट दे दिया है। इससे नरोत्‍तम मिश्रा के समर्थकों की नाराजगी चरम पर पहुंच गई है। सूचना मिलने पर समर्थकों ने सबसे पहले ग्‍वालियर-झांसी नेशनल हाईवे पर जाम लगा दिया। जिससे वाहनों की कई किमी तक लंबी कतारें लग गईं। नरोत्‍तम मिश्रा के समर्थकों ने यह संदेश भाजपा के वरिष्‍ठ नेताओं तक पहुंचाने की कोशिश की कि इस तरह से मनमर्जी चलेगी तो इसका विरोध होगा।

दिए गए सामूहिक इस्‍तीफे

जिलाध्‍यक्ष रघुवीर सिंह कुशवाह ने प्रदेशाध्‍यक्ष हेमंत खंडेलवाल और राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष नितिन नवीन को सामूहिक इस्‍तीफा भेज दिया है। जिलाध्‍यक्ष के साथ ही महामंत्री अतुल भूरे चौधरी, कुलदीप यादव, मंडल अध्‍यक्ष सीतापुर, जनपद उपाध्‍यक्ष के बेटे प्रशांत दांगी, सीतापुर मंडल के महामंत्री मनीष मिश्रा ने हस्‍ताक्षर किए हैं। इस्‍तीफे में जिलाध्‍यक्ष कुशवाह की ओर से जिला पंचायत अध्‍यक्ष, जनपद अध्‍यक्ष, नगर पालिका और नगर परिषद के अध्‍यक्ष-उपाध्‍यक्ष के नाम भी लिखे हैं। विधानसभा क्षेत्र के सभी मंडल अध्‍यक्षों, पार्षदों, मोर्चा अध्‍यक्षों और बूथ अध्‍यक्षों ने भी इस्‍तीफा देने की बात कही है।

बाजार बंद

नरोत्‍तम मिश्रा का टिकट कटते ही इस कदर समर्थकों में रोष हुआ कि बाजार बंद करा दिए गए। समर्थक सड़क पर आ गए। नरोत्‍तम मिश्रा के समर्थकों ने भाजपा कार्यालय में ताला जड़ा और पार्टी के खिलाफ नारे लगाए।

प्रदेश भाजपा ने भेजा सिंगल नाम

प्रदेश भाजपा ने केंद्रीय नेतृत्‍व को आशुतोष तिवारी का सिंगल नाम भेजा। इसके पहले प्रदेश भाजपा ने मुख्यमंत्री से भी चर्चा की थी।

यह भी था चुनौतीपूर्ण समीकरण

नरोत्‍तम मिश्रा मध्यप्रदेश भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं। वे शिवराज सिंह चौहान सरकार में गृहमंत्री रह चुके हैं। उनके जीतने की स्थिति में मोहन सरकार में सत्ता संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण माना जा रहा था। भाजपा में प्रहलाद पटेल, कैलाश विजयवर्गीय और नरेंद्र सिंह तोमर जैसे वरिष्ठ नेता पहले से प्रभावशाली भूमिका में हैं। ऐसे में नरोत्‍तम मिश्रा के विधानसभा पहुंचने पर संगठन और सरकार के बीच शक्ति संतुलन को लेकर नए समीकरण बन सकते थे। फिलहाल प्रदेश संगठन और मुख्यमंत्री के लिए यह सीट प्रतिष्ठा का विषय बन गई है और यहां संगठन की रणनीति की भी परीक्षा होगी।

Back to top button