
पन्ना। अंतरराष्ट्रीय शरद पूर्णिमा महोत्सव के अवसर पर श्री प्राणनाथ जी मंदिर परिसर स्थित रासमंडल के सामने पूरी रात भक्ति, संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का सिलसिला चलता रहा। नन्हे-मुन्ने बच्चों के भजन गायन से शुरू हुए कार्यक्रम में महिला एवं पुरुष कलाकारों ने महामति श्री प्राणनाथ जी की वाणी का सुमधुर गायन कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। बुंदेली भाषा में प्रस्तुत भजनों पर श्रद्धालुओं ने जमकर जयकारे लगाए।

बच्चों के भजनों से हुई सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत
रात्रि के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बच्चों की प्रस्तुतियां विशेष आकर्षण रहीं। इसके बाद महिला और पुरुष कलाकारों ने महामति श्री प्राणनाथ जी की वाणी पर आधारित भक्ति गीतों की प्रस्तुतियां दीं। भक्ति रस से सराबोर इन प्रस्तुतियों ने देर रात तक श्रद्धालुओं को बांधे रखा।

आधी रात के बाद शुरू हुआ रास-गरबा
रात्रि करीब एक बजे के बाद ब्रह्म चबूतरे के प्रांगण में रास-गरबा शुरू हुआ, जो सुबह तक चलता रहा। रंग-बिरंगी पारंपरिक पोशाकों और सोलह शृंगार से सजी महिलाओं ने गरबा नृत्य में उत्साहपूर्वक भाग लिया। वहीं पुरुष श्रद्धालु भी कुर्ता-पायजामा सहित पारंपरिक वेशभूषा में गरबा करते नजर आए।
ढोलक की थाप, झांझर की झंकार और गरबा गीतों की गूंज के बीच पूरा प्रांगण भक्ति और उल्लास से सराबोर रहा। श्रद्धालुओं ने पूरी रात धार्मिक उत्साह के साथ कार्यक्रम में सहभागिता की।

भक्ति और परंपरा का अनूठा संगम
शरद पूर्णिमा की इस विशेष रात्रि में भजन, महामति श्री प्राणनाथ जी की वाणी का गायन और पारंपरिक रास-गरबा आकर्षण का केंद्र रहे। सुबह तक चले आयोजन में सुंदरसाथ ने उत्साह के साथ सहभागिता की।
धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और सामूहिक भक्ति का यह संगम अंतरराष्ट्रीय शरद पूर्णिमा महोत्सव की यादगार झलक बना।
रिपोर्ट: राकेश कुमार शर्मा