
नई दिल्ली। मध्यप्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के तीनों प्रत्याशी तरुण चुग, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिए गए हैं। वहीं कांग्रेस को इस मामले में न तो निर्वाचन आयोग से राहत मिली और न ही सुप्रीम कोर्ट से।
राज्यसभा चुनाव में नामांकन रद्द किए जाने के फैसले को चुनौती देते हुए कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। इसके साथ ही कांग्रेस की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है।
नामांकन रद्द होने के खिलाफ दी थी चुनौती
मीनाक्षी नटराजन ने अपने नामांकन पत्र को रद्द किए जाने के निर्णय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। कांग्रेस ने बुधवार देर रात करीब 1:18 बजे याचिका दायर की, जिस पर गुरुवार को सुनवाई हुई। हालांकि अदालत ने तत्काल कोई राहत नहीं दी और मामले को आगे के लिए सूचीबद्ध किया।
निर्विरोध निर्वाचित घोषित हुए भाजपा प्रत्याशी
गुरुवार को दोपहर 3 बजे नाम वापसी की समय सीमा समाप्त होने के बाद रिटर्निंग ऑफिसर अरविंद शर्मा ने भाजपा के तीनों प्रत्याशियों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया। इससे पहले ही स्पष्ट हो गया था कि मुकाबला एकतरफा हो गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका
शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मीनाक्षी नटराजन की याचिका को खारिज कर दिया गया। निर्वाचन आयोग की ओर से भी इस मामले में कैवियेट दायर की गई थी। कोर्ट के फैसले के बाद अब राज्यसभा चुनाव को लेकर कानूनी रास्ता भी बंद हो गया है।
कांग्रेस का प्रदर्शन, पुलिस से झड़प
इस पूरे घटनाक्रम के विरोध में कांग्रेस ने राष्ट्रपति भवन तक मार्च निकालने की कोशिश की, जिसे पुलिस ने रोक दिया। इस दौरान कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं की पुलिस से झड़प भी हुई। पुलिस ने कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया।