संन्यस्त खड्ग नाटक का मंचन जबलपुर मानस भवन में, सावरकर की विचारधारा जीवंत

जबलपुर। दक्षिण मध्य सांस्कृतिक क्षेत्र (केंद्र सरकार) नागपुर एवं महाराष्ट्र समाज द्वारा आयोजित त्रिदिवसीय संगीत नाटक महोत्सव के दूसरे दिन वीर सावरकर द्वारा लिखित मराठी नाटक “संगीत संन्यस्त खड्ग” का प्रभावशाली मंचन मानस भवन में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।

दीप प्रज्वलन के साथ हुआ शुभारंभ

कार्यक्रम का उद्घाटन प्रसिद्ध अस्थिरोग विशेषज्ञ डॉ. शिरीष नाईक, श्री दत्त भजन मंडल अध्यक्ष विजय भावे, रसरंग सचिव अभय गोरे, महाराष्ट्र ब्रह्मवृंद समाज के अध्यक्ष पं. नीलेश दाभोळकर, बाळबोध शिक्षण मंडल अध्यक्ष प्रदीप फाटक, वासुदेवराव गुरव, प्रमोद पाठक, नाटक निर्देशक चिन्मय कटके (पुणे) एवं महाराष्ट्र समाज के कार्याध्यक्ष एवं पूर्व महापौर सदानंद गोडबोले द्वारा किया गया। मंच संचालन सुरेश मुंजे ने किया।

अहिंसा और राष्ट्र रक्षा के द्वंद्व पर आधारित कथा

स्वातंत्र्यवीर सावरकर द्वारा लिखित यह ऐतिहासिक नाटक बुद्धकालीन पृष्ठभूमि पर आधारित है। इसमें कर्तव्य और संन्यास के द्वंद्व के माध्यम से यह दर्शाया गया है कि अत्यधिक अहिंसा राष्ट्र के लिए घातक हो सकती है और राष्ट्र रक्षा के लिए शस्त्र उठाना आवश्यक हो सकता है। नाटक का मूल संदेश है कि देश की सीमाएं केवल संन्यास से नहीं, बल्कि शक्ति और पराक्रम से सुरक्षित रहती हैं।

ऐतिहासिक घटनाओं से प्रेरित कथानक

नाटक में शाक्य राष्ट्र के सेनापति विक्रम सिंह की कथा प्रस्तुत की गई है, जो गौतम बुद्ध की शिक्षाओं से प्रभावित होकर संन्यास धारण कर लेते हैं। परिणामस्वरूप शस्त्र त्याग के कारण राज्य कमजोर हो जाता है और पड़ोसी राज्यों द्वारा आक्रमण शुरू हो जाते हैं। इस ऐतिहासिक प्रसंग के माध्यम से सावरकर ने अत्यधिक अहिंसा के दुष्परिणामों को उजागर किया है और सशस्त्र क्रांति की आवश्यकता को रेखांकित किया है।

संगीत और अभिनय ने बांधा समां

भरत नाट्य संशोधन मंदिर, पुणे द्वारा निर्मित इस संगीत प्रधान नाटक में “शत जन्म शोधिताना…” जैसे नाट्यगीतों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। नाटक के निर्देशक चिन्मय कटके हैं तथा संगीत रामचंद्रबुवा वझे का रहा।

कलाकारों में अजिंक्य कुलकर्णी, ऐश्वर्या भोळे, घनश्याम वाईकर, राजन कुलकर्णी, चिन्मय कटके, विश्वास पांगारकर एवं कीर्ति कस्तुरे ने अपने सशक्त अभिनय से दर्शकों की खूब सराहना प्राप्त की।

तकनीकी टीम का रहा महत्वपूर्ण योगदान

नेपथ्य का कार्य विश्वास पांगारकर, नरेंद्र वीर एवं मधुरा ताम्हनकर ने संभाला, जबकि वेशभूषा राकेश घोलप द्वारा तैयार की गई। ध्वनि और प्रकाश व्यवस्था सुधीर फडतरे ने संभाली। संगीत संगत में ऑर्गन पर स्वानंद नेने और तबले पर अभिजीत जायदे ने सहयोग दिया।

विशेष अतिथियों की उपस्थिति

इस अवसर पर महाराष्ट्र समाज के सचिव राजेंद्र बर्वे एवं मराठी साहित्य अकादमी के संतोष गोडबोले सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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