जबलपुर की जगन्नाथ रथ यात्रा: 158 साल पुरानी परंपरा का भव्य आयोजन

जगन्‍नाथपुरी की तरह दिखता है जबलपुर का नजारा

जबलपुर। शहर में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा निकालने की परंपरा लगभग 158 साल पुरानी है, जिसमें हजारों लोग भगवान का रथ खींचने के लिए उमड़ते हैं। मुख्य मार्गों से निकलने वाली इस रथ यात्रा में जगदीश मंदिर गढ़ाफाटक, वात्री साहू समाज, जगदीश मंदिर हनुमानताल और बंगाली समाज के रथ शामिल होते हैं। ये सभी रथ बड़ा फुहारा में एकत्र होते हैं और वहां से एक साथ यात्रा करते हुए हनुमानताल तक पहुंचते हैं।

जगदीश मंदिर गढ़ाफाटक

गढ़ाफाटक क्षेत्र में स्थित भगवान जगदीश का यह प्राचीन मंदिर लगभग 503 वर्ष पुराना है। यहां से 158 वर्षों से लगातार रथ यात्रा निकाली जा रही है। रथ यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं और रथ खींचने की परंपरा निभाते हैं। मान्यता है कि भगवान जब स्वस्थ होते हैं तो वह अपनी प्रजा का हाल जानने के लिए बलराम और सुभद्रा के साथ रथ पर निकलते हैं। यहां भगवान को एक क्विंटल भात का भोग अर्पित किया जाता है। इस प्रसाद को पाने के लिए भक्त रथ के सामने हाथ फैलाए खड़े रहते हैं। रथ यात्रा विभिन्न मार्गों से होते हुए मंदिर में विश्राम करती है।

जगदीश मंदिर हनुमानताल

इस मंदिर की स्थापना वर्ष 1870 में हुई थी और यहां से लगभग 126 वर्षों से रथ यात्रा निकाली जा रही है। इस मंदिर में भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और भाई बलराम की सुंदर प्रतिमाएं विराजमान हैं। यहां की रथ यात्रा भी बड़ा फुहारा में मुख्य यात्रा में सम्मिलित होती है।

वात्री साहू समाज की रथ यात्रा

शहर में स्थित श्री जगदीश स्वामी कर्मा माई शंकर भगवान मंदिर ट्रस्ट, जो कि वात्री साहू समाज के अंतर्गत आता है, 135 वर्षों से रथ यात्रा निकाल रहा है। मंदिर लगभग 154 वर्षों से अस्तित्व में है। वर्तमान में इसका निर्माण कार्य घमंडी चौक में चल रहा है, इसलिए अस्थायी मंदिर साहू धर्मशाला गढ़ाफाटक में स्थापित किया गया है। दोपहर में रथ यात्रा प्रारंभ होती है और मुख्य यात्रा में सम्मिलित होती है।

मां कर्मा देवी और खिचड़ी की भक्ति कथा

साहू समाज की आराध्य मां कर्मा देवी के प्रति यह मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ मंदिर छोड़कर उनके हाथ की खिचड़ी खाने आते थे। एक बार भगवान को छप्पन भोग अर्पित किया गया पर उन्होंने ग्रहण नहीं किया। जब कर्मा देवी ने भोग में खिचड़ी अर्पित की, तब भगवान ने उसे स्वीकार किया। तब से मां कर्मा को भगवान की अनन्य भक्त माना जाता है।

बंगाली समाज की रथ यात्रा

बंगाली समाज ने 1962 में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा निकालने की परंपरा शुरू की थी। प्रारंभ में यह अग्रवाल कॉलोनी से निकाली जाती थी। 1967 से यह यात्रा सिटी बंगाली क्लब, करमचंद चौक से नियमित रूप से निकाली जा रही है। समाज के लोग पूरे श्रद्धा भाव से भगवान का रथ खींचते हैं। बंगाली क्लब में मौसी का घर विशेष रूप से बनाया जाता है, जो श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र होता है।

जगन्नाथ मंदिर, खमरिया

खमरिया क्षेत्र में स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर में एक जनवरी 2018 को प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा की गई थी। यहां भी हर वर्ष श्रद्धालु रथ यात्रा का आयोजन भक्तिभाव से करते हैं।

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