देवों की विदाई के साथ भावपूर्ण वातावरण में संपन्न 251 कुण्डीय शक्ति संवर्धन गायत्री महायज्ञ

जबलपुर। नारी सशक्तिकरण वर्ष 2025–26 के निमित्त अखिल भारतीय गायत्री परिवार, गायत्री शक्तिपीठ मनमोहन नगर के तत्वावधान में आयोजित 251 कुण्डीय शक्ति संवर्धन गायत्री महायज्ञ सोमवार को देवों की विदाई एवं पूर्णाहुति के साथ श्रद्धा, शांति और भावनात्मक वातावरण में संपन्न हुआ। यह विराट आध्यात्मिक आयोजन 19 दिसंबर से 22 दिसंबर तक नर्मदा तट स्थित गीता धाम, गौरीघाट में आयोजित किया गया, जिसमें जन-जन की सहभागिता देखते ही बनती थी।

देव विदाई के साथ पूर्णाहुति, भावनाओं का उमड़ा सागर

महायज्ञ के अंतिम दिवस देव विदाई संस्कार के दौरान पूरा यज्ञ परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा और भाव-विभोर वातावरण से सराबोर हो उठा। उपस्थित श्रद्धालुओं ने पूर्ण श्रद्धा और आस्था के साथ देवताओं से प्रार्थना की कि— “समस्त संसार में शांति, सद्भाव और सद्भावना बनी रहे, संस्कारधानी जबलपुर में धर्म और संस्कारों की ज्योति निरंतर प्रज्वलित होती रहे।”

करीब चार घंटे तक चले समापन कार्यक्रम में दोपहर लगभग 4 बजे पूर्णाहुति के साथ महायज्ञ विधिवत संपन्न हुआ। इस दौरान विशाल जनसमूह की उपस्थिति ने आयोजन की भव्यता और सफलता को स्वतः प्रमाणित कर दिया।

ठंड भी आस्था पर भारी नहीं पड़ी

यज्ञ की महिमा ऐसी रही कि कड़ाके की ठंड के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था डगमगाई नहीं। माताएं, बहनें, बच्चे और युवा बड़ी संख्या में शामिल हुए। 70, 80 यहाँ तक कि 90 वर्ष तक की वृद्ध माताएं और बुजुर्ग भी यज्ञ में आहुतियाँ देने पहुंचे। ठंड के बावजूद अनुशासन, श्रद्धा और उत्साह पूरे आयोजन में देखने को मिला।

रक्तदान, पौधारोपण और सेवा का संदेश

महायज्ञ के साथ सेवा और समाज-निर्माण का संदेश भी दिया गया। युवाओं द्वारा रक्तदान कार्यक्रम आयोजित किया गया। जनप्रतिनिधियों एवं आयोजकों के माध्यम से पौधारोपण का संदेश देते हुए लोगों को पौधे भेंट कर उन्हें रोपित करने का संकल्प दिलाया गया। यह आयोजन केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का सशक्त उदाहरण बना।

प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र

महायज्ञ स्थल पर परमपूज्य गुरुदेव पं. श्रीराम शर्मा आचार्य एवं वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा के जीवन दर्शन पर आधारित भव्य प्रदर्शनी लगाई गई। गुरुदेव के विचार, जीवन दर्शन और युग निर्माण संदेशों से लोग प्रेरित हुए। प्रदर्शनी देखने के लिए दिनभर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती रही।

भोजन व व्यवस्थाएं सराहनीय

आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं के लिए भोजन-प्रसादी एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं सुचारू रूप से की गई थीं। अनुशासन, सेवा भावना और स्वयंसेवकों की तत्परता हर व्यवस्था में दिखाई दी।

विशेष आयोजनों ने बढ़ाई गरिमा

महायज्ञ के दौरान योग, ध्यान, प्राणायाम प्रवचन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम, विराट 11000 दीप महायज्ञ, निःशुल्क चिकित्सा परामर्श शिविर, विशाल पुस्तक मेला जैसे आयोजनों ने कार्यक्रम को बहुआयामी और जनोपयोगी बनाया।

आयोजकों का संदेश

आयोजकों ने कहा कि गायत्री महायज्ञ का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि व्यक्ति निर्माण, परिवार निर्माण, समाज निर्माण और राष्ट्र निर्माण की भावना को सशक्त करना है। यज्ञ के माध्यम से संस्कार, स्वास्थ्य, सद्भाव और शांति का संदेश समाज तक पहुँचाया गया।

इनकी रही उपस्थिति

महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू, विधायक अशोक रोहाणी, हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टर पुष्पराज पटेल, दृष्टि रोग विशेषज्ञ डॉक्टर पवन स्थापक, गुरुधाम के श्री आसवदास जी महाराज, नर्मदा आरती संयोजक ओमकार दुबे, नगर निगम अध्यक्ष रिंकूज विज, नेता प्रतिपक्ष अंबरीश मिश्रा उपस्थित थे।

आयोजन छोड़ गया अमिट छाप

251 कुण्डीय शक्ति संवर्धन गायत्री महायज्ञ न केवल एक धार्मिक आयोजन रहा, बल्कि यह आध्यात्मिक चेतना, सामाजिक सेवा और सांस्कृतिक जागरण का विराट संगम बनकर उभरा। देवों की विदाई के साथ संपन्न हुआ यह महायज्ञ श्रद्धालुओं के मन में शांति, ऊर्जा और संस्कारों की अमिट छाप छोड़ गया, जो आने वाले समय में समाज को नई दिशा देगा।

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