
इमरजेंसी एग्जिट के सामने लगाई थीं सीटें
कार्रवाई के दौरान विभाग को कई बसों में ऐसी व्यवस्थाएं मिलीं, जो आपात स्थिति में यात्रियों के लिए परेशानी का कारण बन सकती हैं। छह बसों में इमरजेंसी एग्जिट के सामने सीटें लगाकर रास्ता बाधित किया गया था। अधिकारियों ने मौके पर ही इन सीटों को हटवाकर आपातकालीन रास्ता खुलवाया।
तेज रोशनी और प्रेशर हार्न भी मिले
जांच टीम को कुछ बसों में अत्यधिक तेज रोशनी वाली सर्च लाइट और बीम लाइट लगी मिलीं। रात में इनकी रोशनी सामने से आने वाले वाहन चालकों के लिए परेशानी पैदा कर सकती है। सड़क सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ऐसी लाइटों को मौके पर ही हटवा दिया गया।
इसके अलावा बसों में तेज आवाज वाले प्रेशर हार्न भी पाए गए। नियमों के विपरीत लगे इन हार्न को भी निकलवाया गया। कुछ वाहनों में एचएसआरपी नंबर प्लेट से संबंधित कमियां सामने आईं, जिस पर संबंधित वाहन संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की गई।
ओवरलोडिंग पर भी कार्रवाई
अभियान के दौरान एक बस में निर्धारित क्षमता से ज्यादा यात्रियों को ले जाते हुए पकड़ा गया। विभाग ने ओवरलोड यात्री परिवहन के मामले में भी चालान किया। बसों में उपलब्ध अग्निशमन यंत्रों की स्थिति भी जांची गई और संचालकों को इन्हें हमेशा कार्यशील हालत में रखने के निर्देश दिए गए।
14 वाहनों से 52 हजार रुपये का राजस्व
परिवहन विभाग की यह कार्रवाई परिवहन आयुक्त उमेश जोगा के निर्देश और कलेक्टर राघवेंद्र सिंह के आदेश के तहत जिला परिवहन अधिकारी रिंकू शर्मा की निगरानी में हुई। आरटीओ रिंकू शर्मा, आरटीआई विक्रम सिंह ठाकुर सहित टीम ने बसों की जांच की।
अभियान में नियमों का उल्लंघन करने वाले 14 वाहनों से कुल 52 हजार रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। विभाग ने बस संचालकों को चेतावनी दी है कि यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े नियमों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
आगे भी जारी रहेगा जांच अभियान
अधिकारियों के अनुसार यात्री बसों में सुरक्षा मानकों और परिवहन नियमों के पालन की जांच का अभियान आगे भी जारी रहेगा। विभाग का उद्देश्य बस यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ नियमों का पालन कराना है।