
पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया वर्ष 2025 में पूरी होने के बाद चयनित शोधार्थियों के लिए कोर्सवर्क की कक्षाएं 10 नवंबर 2025 से शुरू की गई थीं। विश्वविद्यालय ने कोर्सवर्क को मई 2026 तक पूरा कराने और इसके बाद जून में परीक्षा आयोजित करने की योजना बनाई थी। हालांकि तय समयसीमा गुजरने के बाद भी परीक्षा को लेकर कोई नया कार्यक्रम सामने नहीं आया है।
पुराने कार्यक्रम की समयसीमा हुई पार
विश्वविद्यालय ने पीएचडी प्रवेश से संबंधित प्रक्रिया के लिए मार्च 2025 में अधिसूचना जारी की थी। प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने के बाद शोधार्थियों का कोर्सवर्क शुरू कराया गया। बाद में 4 नवंबर 2025 को जारी अधिसूचना में कोर्सवर्क की अवधि और परीक्षा को लेकर समय-सारणी निर्धारित की गई थी।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 10 मई 2026 तक कोर्सवर्क पूरा होना था और जून 2026 में परीक्षा कराने का लक्ष्य था। लेकिन अब सितंबर का समय चल रहा है और परीक्षा प्रक्रिया की शुरुआत तक नहीं हो सकी है। इससे विश्वविद्यालय की तय समय-सारणी पर भी सवाल उठ रहे हैं।
परीक्षा के बाद आगे बढ़ेगी शोध प्रक्रिया
कोर्सवर्क परीक्षा पीएचडी की आगे की प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण चरण है। परीक्षा के बाद शोधार्थियों की शोध योजना से संबंधित गतिविधियां आगे बढ़ती हैं। शोध प्रस्ताव और सिनॉप्सिस सहित विभिन्न प्रक्रियाएं शोध सलाहकार समिति (आरएसी) के स्तर पर पूरी की जाती हैं।
परीक्षा में देरी होने से इन चरणों की शुरुआत भी प्रभावित हो सकती है। शोधार्थियों का कहना है कि परीक्षा की तारीख स्पष्ट नहीं होने से वे अपनी आगामी अकादमिक योजना भी तय नहीं कर पा रहे हैं।
आवेदन और परिणाम को लेकर भी अनिश्चितता
वर्तमान स्थिति में शोधार्थियों के सामने परीक्षा को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल हैं। परीक्षा फॉर्म कब जारी होंगे, परीक्षा किस महीने आयोजित होगी और परिणाम कितने समय में घोषित किया जाएगा—इन सभी बिंदुओं पर फिलहाल स्पष्ट कार्यक्रम का इंतजार है।
नामांकन की प्रक्रिया पूरी होने में भी देरी की बात सामने आ रही है। ऐसे में प्रवेश से लेकर कोर्सवर्क और परीक्षा तक की प्रक्रिया लंबी खिंचने से शोधार्थियों के अकादमिक कैलेंडर पर इसका असर पड़ रहा है।
विश्वविद्यालय के परीक्षा कैलेंडर पर भी उठे सवाल
पीएचडी परीक्षा में देरी को विश्वविद्यालय की व्यापक परीक्षा व्यवस्था से अलग करके नहीं देखा जा रहा है। चालू शैक्षणिक सत्र में स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर की कुछ परीक्षाओं के कार्यक्रम भी प्रभावित हुए हैं। ऐसे में शोधार्थियों की परीक्षा में हो रहा विलंब विश्वविद्यालय के अकादमिक कैलेंडर को समय पर संचालित करने की चुनौती को और उजागर करता है।
संशोधित समय-सारणी जारी होने का इंतजार
अब शोधार्थियों की नजर विश्वविद्यालय प्रशासन की अगली अधिसूचना पर है। जून की निर्धारित समयसीमा निकल चुकी है और सितंबर तक परीक्षा कार्यक्रम नहीं आने से यह स्पष्ट नहीं है कि लंबित परीक्षा कब आयोजित होगी। शोधार्थी चाहते हैं कि विश्वविद्यालय जल्द से जल्द तारीख घोषित कर पूरी प्रक्रिया के लिए संशोधित समय-सारणी जारी करे।