
राजीव उपाध्याय
जबलपुर। नेताजी सुभाषंचद्र बोस मेडिकल अस्पताल प्रशासन की नींद चूहों ने उड़ा दी है। मेडिकल अस्पताल के मनोरोग विभाग में भर्ती दो मरीज और एक अटेंडर के पैर कुतरने की घटना ने तूल पकड़ लिया है। आनन-फानन में तो एजेंसी पर मेडिकल प्रशासन ने 50 हजार रूपए का जुर्माना लगा दिया लेकिन इससे काम नहीं चलेगा। अब रिपोर्ट तैयार करके कलेक्टर तक पहुंचानी है जिसमें बताया जाएगा कि इस घटना के लिए जो जिम्मेदार हैं उन पर क्या कार्रवाई की गई। यह रिपोर्ट तीन सदस्यी कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर तैयार की जाएगी।
खुली लचर सिस्टम की पोल
एमवाय अस्पताल इंदौर के बाद नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल अस्पताल में चूहों ने लचर सिस्टम की पोल खोल दी है। सिस्टम यदि मजबूत होता तो जिम्मेदारों को वार्ड में चूहे दिखते। लेकिन चूहे मरीजों के पैर कुतरते रहे और किसी को नजर नहीं आए। वहीं जिस एजेंसी को चूहों को कंट्रोल करने की जिम्मेदारी दी गई है वे भी चूहों पर कंट्रोल नहीं कर सके।
मॉनिटरिंग पूरे सिस्टम की जरूरी
एमवाय हॉस्टिपल इंदौर और नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल अस्पताल जबलपुर में चूहों के उत्पात के उदाहरण सामने आ गए तो मेडिकल प्रशासन जागा। लेकिन क्या यह जरूरी नहीं है कि सभी सरकारी अस्पतालों की मॉनिटरिंग हो। प्रदेश के सरकारी मेडिकल अस्पताल, जिला अस्पताल, सीएचसी, पीएचसी में पेस्ट कंट्रोल पर सालभर में लाखों रूपए खर्च होते हैं।
एजेंसी को ठेका दिया जाता है लेकिन वह कितना काम कर रही है इसकी मॉनिटरिंग पर सवाल उठ रहे हैं। यदि एजेंसी सही काम कर रही हैं तो चूहे कैसे बढ़े और वार्डों में किस तरह से मरीजों के पैर कुतर रहे हैं। मेडिकल प्रशासन ने केवल ठेका देकर अपने फर्ज की इतिश्री कर ली। इसके बाद यह देखा भी नहीं जा रहा कि विभागों में पेस्ट कंट्रोल सही तरीके से हो रहा है कि नहीं। यदि किया है तो उसके बाद उस वार्ड की क्या स्थिति है। ऐसा लगता है कि इसकी मानिटरिंग नहीं की जा रही है। यदि की जा रही होती तो यह नौबत नहीं आती।
परिसर में गंदगी
चूहे वहां आएंगे जहां गंदगी होगी। मेडिकल अस्पताल जबलपुर के परिसर में गंदगी फैली रहती है। परिजन भी परिसर में बैठकर खाना खाते हैं। जिससे वहां चूहे आते हैं। सफाई के लिए अलग ठेका दिया गया है। इसके बाद भी गंदगी पाई जा रही है।
किस पर गिरेगी गाज
नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल अस्पताल प्रशासन की ओर से तीन सदस्यी समिति की रिपोर्ट मेडिकल कॉलेज के डीन को सौंपी गई है। इस रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई रिपोर्ट मेडिकल कॉलेज प्रशासन तैयार करेगा। इस रिपोर्ट से पता चलेगा कि इसमें कौन दोषी हैं, किस पर गाज गिरेगी। मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ नवनीत सक्सेना का कहना है कि अगले दो दिन में रिपोर्ट तैयार हो जाएगी।