
राकेश कुमार शर्मा
पन्ना। भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण तथा भारतीय वन्यजीव संस्थान के संयुक्त मार्गदर्शन में संचालित अखिल भारतीय बाघ आकलन (AITE-2026) के अंतर्गत दक्षिण पन्ना वनमण्डल में की गई कैमरा ट्रैपिंग से क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता सामने आई है। इस वैज्ञानिक प्रक्रिया के माध्यम से वन क्षेत्र में निवास करने वाले अनेक दुर्लभ और महत्वपूर्ण वन्यजीवों की गतिविधियों का दस्तावेजीकरण किया गया।

150 ग्रिड पॉइंट पर लगाए गए 300 कैमरे
फरवरी और मार्च माह के दौरान वनमण्डल के 150 ग्रिड पॉइंट्स पर कुल 300 ट्रैप कैमरे लगाए गए। इन कैमरों के माध्यम से वन्यजीवों के आवागमन, गतिविधियों और उनके प्राकृतिक व्यवहार का विस्तृत वैज्ञानिक रिकॉर्ड तैयार किया गया। कैमरों की सहायता से उन प्रजातियों की भी तस्वीरें और जानकारी सामने आईं, जिन्हें सामान्य परिस्थितियों में देख पाना कठिन होता है।

कैमरों में कैद हुई कई दुर्लभ प्रजातियां
कैमरा ट्रैपिंग के दौरान कई महत्वपूर्ण और दुर्लभ वन्यजीवों की उपस्थिति दर्ज की गई। इनमें तेंदुआ, स्लॉथ बेयर (भालू), लकड़बग्घा, सांभर, चीतल, काकड़, सिवेट, हनी बैजर, पैंगोलिन, साही, जंगली सूअर, नीलगाय, लंगूर, भारतीय भेड़िया और सियार शामिल हैं। वन्यजीवों की इतनी विविधता यह दर्शाती है कि क्षेत्र का प्राकृतिक पारितंत्र संतुलित और समृद्ध है।

क्या है कैमरा ट्रैपिंग तकनीक
कैमरा ट्रैपिंग एक आधुनिक वैज्ञानिक तकनीक है, जिसमें वन्यजीवों के नियमित आवागमन वाले मार्गों पर स्वचालित कैमरे लगाए जाते हैं। जैसे ही कोई वन्यजीव कैमरे के सामने से गुजरता है, सेंसर सक्रिय होकर उसकी तस्वीर या वीडियो रिकॉर्ड कर लेते हैं। यह तकनीक विशेष रूप से रात्रिचर, दुर्लभ और छिपकर रहने वाले जीवों के अध्ययन के लिए बेहद प्रभावी मानी जाती है।

प्रमुख वन्यजीवों की खासियत
तेंदुआ – अत्यंत फुर्तीला और अनुकूलनशील परभक्षी, जो पेड़ों पर चढ़कर अपने शिकार को सुरक्षित रखने की क्षमता रखता है।
स्लॉथ बेयर (भालू) – दीमक और चींटियों को खाने में माहिर, मजबूत पंजों से जमीन खोदकर भोजन प्राप्त करता है।
लकड़बग्घा – पारितंत्र का सफाईकर्मी माना जाता है, जो मृत जीवों को खाकर पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में मदद करता है।
भारतीय भेड़िया – घासभूमि क्षेत्रों में रहने वाला प्रमुख परभक्षी, जो समूह में शिकार करने के लिए जाना जाता है।
पैंगोलिन – शल्कों से ढका दुर्लभ स्तनधारी जीव, जो खतरे की स्थिति में गोलाकार होकर खुद की रक्षा करता है।
हनी बैजर – निडर और शक्तिशाली जीव, जो जमीन खोदकर भोजन तलाशने में दक्ष होता है।
सिवेट – रात्रिचर जीव, जो बीज प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाकर जंगलों के पुनर्जनन में सहायक होता है।
सांभर – भारत का सबसे बड़ा हिरण, जो बड़े परभक्षियों का प्रमुख शिकार भी माना जाता है।
काकड़ (बार्किंग डियर) – भौंकने जैसी आवाज निकालने के कारण प्रसिद्ध, बेहद सतर्क स्वभाव का हिरण।
चीतल – झुंड में रहने वाला धब्बेदार हिरण, जो स्वस्थ और संतुलित पारितंत्र का संकेत माना जाता है।
साही (Porcupine) – कांटेदार शरीर वाला रात्रिचर जीव, जो खतरे की स्थिति में अपने कांटों से खुद की रक्षा करता है।
पारितंत्र के लिए शुभ संकेत
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार दक्षिण पन्ना वनमण्डल में इतने विविध वन्यजीवों की उपस्थिति यह दर्शाती है कि यहां का पारितंत्र संतुलित, समृद्ध और जैविक रूप से स्वस्थ है। AITE-2026 के अंतर्गत प्राप्त यह आंकड़े भविष्य में वन्यजीव संरक्षण और प्रबंधन की नीतियों के लिए महत्वपूर्ण आधार साबित होंगे।