आर्ट ऑफ लिविंग के 45 वर्ष पूरे, 10 मई को पीएम करेंगे ध्यान मंदिर का उद्घाटन

आर्ट ऑफ लिविंग की स्थापना वर्ष 1981 में हुई थी

बेंगलुरु। आध्यात्मिक और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में सक्रिय आर्ट ऑफ लिविंग संस्था अपने 45 वर्ष पूरे होने का उत्सव मना रही है। इस खास मौके पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 मई को बेंगलुरु स्थित आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगे और नवनिर्मित ध्यान मंदिर का उद्घाटन करेंगे। यह आयोजन संस्था के संस्थापक श्री श्री रवि शंकर जी के 70वें जन्मोत्सव के अवसर पर भी खास बन गया है।

ध्यान मंदिर के साथ कई सामाजिक परियोजनाओं को मिलेगी गति

इस कार्यक्रम के दौरान ध्यान मंदिर का उद्घाटन केवल एक संरचना का लोकार्पण नहीं होगा, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक परिवर्तन से जुड़े कई दीर्घकालिक प्रोजेक्ट्स को भी नई दिशा मिलेगी। संस्था का फोकस समाज में सकारात्मक बदलाव लाने और लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने पर है।

45 वर्षों की यात्रा: सेवा, साधना और समाज सुधार

आर्ट ऑफ लिविंग की स्थापना वर्ष 1981 में हुई थी और आज यह संस्था 180 से अधिक देशों में अपनी पहचान बना चुकी है। लाखों स्वयंसेवकों के नेटवर्क के साथ यह संगठन शिक्षा, स्वास्थ्य और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए कार्य कर रहा है। संस्था के संस्थापक श्री श्री रवि शंकर ने कहा कि एक स्वस्थ समाज की पहचान हर चेहरे पर मुस्कान से होती है और यही उनका वर्षों से लक्ष्य रहा है।

शिक्षा और पर्यावरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान

संस्था ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में 1300 से अधिक निःशुल्क स्कूल चला रही है, जिससे लाखों बच्चों को शिक्षा मिल रही है। इसके साथ ही कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं। पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में नदियों के पुनर्जीवन, वृक्षारोपण और जल संरक्षण जैसे अभियानों में भी संस्था सक्रिय भूमिका निभा रही है।

वैश्विक स्तर पर बढ़ता प्रभाव और कार्यक्रम

आर्ट ऑफ लिविंग ने दुनियाभर में सांस्कृतिक और शांति कार्यक्रमों के जरिए अपनी पहचान मजबूत की है। बेंगलुरु, बर्लिन, नई दिल्ली और वाशिंगटन डीसी जैसे शहरों में आयोजित कार्यक्रमों ने वैश्विक स्तर पर लोगों को जोड़ा है। इसके साथ ही संस्था द्वारा 13 मई को एक वैश्विक ध्यान कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें दुनिया भर के लोग ऑनलाइन शामिल होंगे।

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