
राकेश कुमार शर्मा
पन्ना। भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान के बीच दक्षिण पन्ना वनमण्डल के रैपुरा वन परिक्षेत्र से पर्यावरण संरक्षण और संवेदनशील मानवीय प्रयासों की प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है। राज्य शासन के “जल गंगा संवर्धन अभियान” के अंतर्गत वन विभाग द्वारा जंगलों में वन्यजीवों एवं पर्यावरण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मधुमक्खियों के संरक्षण हेतु विशेष जल व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इस अभिनव पहल की स्थानीय ग्रामीणों एवं प्रकृति प्रेमियों द्वारा सराहना की जा रही है।

झिरिया निर्माण से जंगल में बनी जल उपलब्धता
दक्षिण पन्ना वनमण्डल के अंतर्गत रैपुरा वन परिक्षेत्र की सागौनी, भरतला, चमरैया, जमुनिया एवं बघनरवा बीटों में पारंपरिक जल स्रोत “झिरिया” का निर्माण तथा पुरानी झिरियों की मरम्मत का कार्य युद्धस्तर पर किया गया। इन प्रयासों के चलते भीषण गर्मी में भी वन क्षेत्रों में जल उपलब्धता बनी हुई है, जिससे मधुमक्खियों सहित कई छोटे वन्यजीवों को राहत मिल रही है। जल स्रोतों के आसपास बड़ी संख्या में सक्रिय मधुमक्खियों के छत्ते भी देखे जा रहे हैं।
मधुमक्खियों की सुरक्षा के लिए अपनाई अनूठी तकनीक
वन विभाग के मैदानी अमले ने मधुमक्खियों की सुरक्षा के लिए एक व्यावहारिक और संवेदनशील तकनीक अपनाई है। सामान्यतः खुले अथवा गहरे जल स्रोतों पर पानी पीते समय मधुमक्खियां डूब जाती हैं। इसे रोकने के लिए जल स्रोतों की उथली जगहों पर छोटे पत्थर और सूखी लकड़ियों की डंडियां रखी गई हैं, ताकि मधुमक्खियां सुरक्षित बैठकर आसानी से पानी पी सकें। इस छोटे लेकिन प्रभावी प्रयास से प्रतिदिन हजारों मधुमक्खियों की रक्षा हो रही है।

जैव विविधता संरक्षण में मधुमक्खियों की अहम भूमिका
विशेषज्ञों के अनुसार मधुमक्खियां पारिस्थितिक तंत्र के संतुलन एवं परागण प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाती हैं। ऐसे में उनका संरक्षण सीधे तौर पर जैव विविधता संरक्षण से जुड़ा हुआ है। “जल गंगा संवर्धन अभियान” के माध्यम से जल संरक्षण के साथ-साथ प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूत आधार मिल रहा है।
वनकर्मियों की संवेदनशीलता बनी प्रेरणा
इस पुनीत कार्य को सफलतापूर्वक क्रियान्वित करने में वनरक्षक रजनीश चौरसिया, प्रेमशंकर सिंह, धीरेन्द्र सिंह एवं वनरक्षक सतीश द्विवेदी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। भीषण गर्मी और कठिन परिस्थितियों के बावजूद वनकर्मियों द्वारा दिखाई गई संवेदनशीलता और कर्तव्यपरायणता समाज को प्रकृति संरक्षण का सकारात्मक संदेश दे रही है।