
राकेश कुमार शर्मा
पन्ना। कभी हर आंगन की पहचान रही गौरैया आज बदलते परिवेश और घटते प्राकृतिक आवासों के कारण अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही है। ऐसे समय में दक्षिण पन्ना वन मंडल के सलेहा वन परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम पटना तमोली में ग्राम वन समिति अध्यक्ष अजय चौरसिया द्वारा वर्षों से किया जा रहा प्रयास गौरैया संरक्षण की प्रेरक मिसाल बन गया है।

एक घटना ने बदल दी सोच
अजय चौरसिया बताते हैं कि कई वर्ष पहले उन्होंने अपने घर के एक कोने में एक गौरैया को घोंसला बनाते देखा था। वह अपने भावी परिवार के लिए सुरक्षित आशियाना तैयार कर रही थी, लेकिन एक दिन अचानक पंखे से टकराकर उसकी मौत हो गई। इस घटना ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया और तभी उन्होंने पक्षियों के लिए सुरक्षित घर बनाने का संकल्प लिया।

टाट और गत्तों से शुरू हुई मुहिम
शुरुआत में अजय ने टाट और गत्तों से घोंसले तैयार किए। बाद में प्लाईवुड से पक्षी घर बनवाए और फिर स्थानीय भाषा में तुम्बी या तुमड़िया कहलाने वाली सूखी लौकी से 15 से 20 प्राकृतिक पक्षी घर स्थापित किए। कुछ ही समय में गौरैयाओं ने इन घरों को अपना आशियाना बना लिया।
सैकड़ों नन्हे मेहमानों की चहचहाहट
तिनकों और पंखों से सजे इन पक्षी घरों में गौरैयाओं ने अंडे दिए और देखते ही देखते यहां नन्हे मेहमानों की चहचहाहट गूंजने लगी। वर्षों से चल रही इस मुहिम के परिणामस्वरूप अब तक सैकड़ों गौरैया शावकों का जन्म इन पक्षी घरों में हो चुका है।
दाने-पानी की भी नियमित व्यवस्था
केवल आशियाना ही नहीं, बल्कि गर्मी के मौसम में पक्षियों के लिए पानी और दाने की भी नियमित व्यवस्था की जाती है। इससे गौरैया के साथ-साथ अन्य पक्षियों को भी राहत मिलती है और उनकी प्यास बुझती है।
बदलती जीवनशैली ने छीना प्राकृतिक आवास
अजय चौरसिया का कहना है कि कच्चे मकानों की जगह पक्के भवनों ने ले ली है, लेकिन इसी बदलाव ने गौरैया जैसे मानव बस्तियों के साथ रहने वाले पक्षियों का प्राकृतिक आवास छीन लिया है। आज उन्हें घोंसला बनाने और अपने बच्चों के पालन-पोषण के लिए सुरक्षित स्थान नहीं मिल पा रहा है।
वन विभाग ने की पहल की सराहना
वन मंडलाधिकारी अनुपम शर्मा ने कहा कि गौरैया केवल एक पक्षी नहीं, बल्कि स्वस्थ पर्यावरण और जैव विविधता का महत्वपूर्ण संकेतक है। ये छोटे पक्षी कीट नियंत्रण में अहम भूमिका निभाते हैं और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन को बनाए रखने में योगदान देते हैं।
ग्रामीण भी बन रहे पक्षी मित्र
इस पहल से प्रेरित होकर गांव के कई लोगों ने भी अपने घरों में पक्षी घर लगाए हैं तथा गर्मियों में पक्षियों के लिए पानी के सकोरे रखना शुरू कर दिया है। इससे क्षेत्र में प्रकृति संरक्षण के प्रति लोगों की संवेदनशीलता और जागरूकता बढ़ रही है।
प्रेरणा बन रही पटना तमोली की मुहिम
एक गौरैया की दर्दनाक मृत्यु से शुरू हुई यह छोटी-सी पहल आज प्रकृति प्रेम, करुणा और संरक्षण की बड़ी कहानी बन चुकी है। पटना तमोली से उठी यह मुहिम संदेश देती है कि यदि हम अपने घरों और आंगनों में पक्षियों के लिए थोड़ी-सी जगह और थोड़ा-सा पानी छोड़ दें, तो न केवल गौरैया की चहचहाहट लौट सकती है, बल्कि प्रकृति के साथ हमारा आत्मीय रिश्ता भी और मजबूत हो सकता है।