भाई दूज पर बहनों ने की पूजा-अर्चना, जबलपुर में भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का उत्सव

जबलपुर। कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पर मनाया जाने वाला भाई दूज का पर्व आज शहर भर में धूमधाम से मनाया गया। यह पर्व दीपावली के तीसरे दिन आता है और भाई-बहन के पवित्र और स्नेहिल संबंध का प्रतीक माना जाता है। बहनों ने भाइयों की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना करते हुए पारंपरिक रीति-रिवाज़ों के साथ पूजा-अर्चना की। मंदिरों, घरों और मोहल्लों में भाई-बहन एक-दूसरे के प्रति अपनापन और सुरक्षा की भावना का आदान-प्रदान करते दिखे।

भाई दूज के दिन की परंपरा के अनुसार बहनें सबसे पहले भाई के माथे पर रोली या चंदन का तिलक करती हैं और तिलक के आसपास अक्षत (अविनाशी चावल) लगाती हैं। इसके बाद भाई के कंधे पर या हाथ में कलावा बांधती हैं। बहन द्वारा की गई यह रस्म भाई की सुरक्षा और उसके उत्तम स्वास्थ्य का प्रतीक मानी जाती है।

मेहमानों और रिश्तेदारों के बीच भाई को पारंपरिक भोजन खिलाया जाता है। अक्सर मिठाई, विशेष पकवान और घर के बने व्यंजन इस दिन परोसे जाते हैं। कई परिवारों में बहनें भाई के लिए विशेष पकवान और उपहार भी तैयार करती हैं। पूजा की समाप्ति पर घी का दीपक जलाकर भाई की आरती की जाती है और उसकी लंबी आयु एवं खुशहाली के लिए मंगलकामना की जाती है।

भाई दूज से जुड़ी एक लोककथा यह है कि इस दिन यमराज अपनी बहन यमुना के घर गए थे और यमुना ने उनका आदर-सत्कार किया था। तभी से यह दिन भाई-बहन के प्रति स्नेह और रक्षा का प्रतीक बन गया। इस पौराणिक कथा के कारण कई जगहों पर यम-यमुना की मान्यताओं को भी श्रद्धा के साथ याद किया जाता है।

जबलपुर में उत्सव की रंगत और सामाजिक मायने

जबलपुर में बहनों ने पारंपरिक रीति-रिवाज़ों का पालन करते हुए घर पर सज-धज कर भाई की पूजा-अर्चना की। कुछ परिवारों में सुबह मंदिर प्रार्थना के बाद भाई के सिर पर तिलक किया गया, तो कुछ घरों में पारिवारिक मिलन समारोह के साथ आयोजन हुआ। शहर के शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों में भाई दूज की खुशी समान रूप से देखी गई। बाजारों में मिठाई और उपहारों की रौनक बनी रही और पारिवारिक मिलन का माहौल व्याप्त रहा।

त्योहार के सामाजिक और भावनात्मक मायने भी गहरे हैं। आज के बदलते समय में जहां अक्सर लोग अलग-अलग शहरों या देशों में रहते हैं, भाई दूज का अवसर परिवार के सदस्य फिर से साथ आने, संवाद बढ़ाने और पुराने रिश्तों को ताज़ा करने का माध्यम बनता जा रहा है। बहनों की ओर से किया गया तिलक और भाई की ओर से दिया गया आश्वासन आपसी भरोसे और जिम्मेदारी की पुष्टि करता है।

भाई दूज का त्योहार केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है। यह पारिवारिक संस्कृति, आदान-प्रदान और परोपकार का उत्सव भी है। बहनें अपने भाइयों के लिए आशीर्वाद मांगती हैं और भाई अपने बहनों के प्रति सुरक्षा और सहयोग का वचन देते हैं। इस प्रकार यह पर्व समाज में आपसी स्नेह और संवेदनशीलता को मजबूत करने का एक माध्यम बनता है।

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