
जबलपुर। गुरु पूर्णिमा महोत्सव के अंतर्गत श्री गीता धाम, गौरीघाट में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के चतुर्थ दिवस पर कथा व्यास परम पूज्य श्रीमद् जगद्गुरु डॉ. स्वामी नरसिंहदेवाचार्य जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य प्राकट्य एवं बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन करते हुए कहा कि भगवान को धन, वैभव या बल से नहीं, बल्कि निष्कपट प्रेम और समर्पित भक्ति से प्राप्त किया जा सकता है।

अधर्म के नाश और धर्म की स्थापना के लिए होता है भगवान का अवतार
उन्होंने कहा कि जब-जब पृथ्वी पर अधर्म बढ़ता है, तब-तब भगवान धर्म की स्थापना और भक्तों के उद्धार के लिए अवतार लेते हैं। श्रीकृष्ण का अवतार मानव मात्र को प्रेम, करुणा, धर्म और कर्तव्य का संदेश देने के लिए हुआ है।
श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का हुआ भावपूर्ण वर्णन
कथा में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म, वसुदेव द्वारा यमुना पार कर गोकुल ले जाने, नंदोत्सव, पूतना उद्धार, शकटासुर एवं तृणावर्त वध, माखन चोरी, दामोदर लीला तथा यमलार्जुन उद्धार के प्रसंगों का विस्तृत वर्णन किया गया।

कृष्ण जन्मोत्सव पर झूम उठे श्रद्धालु
श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के अवसर पर पूरा कथा पंडाल “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने भक्ति-भाव के साथ भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव बड़े उत्साह और धूमधाम से मनाया।
इन श्रद्धालुओं ने किया व्यासपीठ पूजन
इस अवसर पर रमेश भसेड़िया, दीपक साहू, आभा साहू, सतीश साहू, सत्येंद्र जोतशी, राजेन्द्र प्यासी एवं इंदुलता प्यासी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और व्यासपीठ पूजन कर कथा श्रवण का पुण्य लाभ प्राप्त किया।