
घटना के बाद पुलिस ने अवैध शराब की सप्लाई से जुड़े लोगों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। मामले में करीब 30 लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया है और 14 संदिग्ध आरोपियों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि शराब का स्रोत क्या था और इसे लोगों तक पहुंचाने में किन लोगों की भूमिका रही।
अधिकारियों पर भी कार्रवाई
मामले में प्रशासनिक स्तर पर भी जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। बंडा क्षेत्र के एसडीएम और एसडीओपी को हटाए जाने के साथ आबकारी विभाग और पुलिस से जुड़े कुछ कर्मचारियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई है। अधिकारियों की भूमिका और संभावित लापरवाही की भी जांच की जा रही है।
शराब में जहरीले पदार्थ की आशंका
मौतों की असली वजह जानने के लिए मृतकों के पोस्टमार्टम के दौरान लिए गए नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही मौतों के वास्तविक कारण और शराब में किसी जहरीले पदार्थ की मौजूदगी की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
सप्लाई चेन की तलाश में जुटी पुलिस
पुलिस जांच का एक प्रमुख बिंदु शराब की सप्लाई चेन है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि संदिग्ध शराब कहां से आई, किसने उसे खरीदा या तैयार किया और किन माध्यमों से प्रभावित गांवों तक पहुंचाई गई। संभावित ठिकानों और आरोपियों के संपर्कों की भी पड़ताल की जा रही है।
मजिस्ट्रियल जांच के आदेश
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने मजिस्ट्रियल जांच के निर्देश दिए हैं। जांच में मौतों के कारण के साथ-साथ अवैध शराब की बिक्री, सप्लाई नेटवर्क और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली की भी समीक्षा की जाएगी।
मृतकों के परिवारों को आर्थिक सहायता
उधर, मृतकों के परिवारों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की गई है। प्रशासन का कहना है कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।