कान्हा की बांसुरी की धुनों में मग्न हुए श्रोता, कलाकारों की मनमोहक प्रस्तुति ने बांधा समां

जबलपुर। “गोविंद बोलो हरि गोपाल बोलो”, “ज्योति कलश छलके”, “राधे-राधे गोविंदा” सहित श्रीकृष्ण की भक्ति से ओतप्रोत रचनाओं और बांसुरी की मधुर धुनों ने शहीद स्मारक प्रेक्षागृह में आध्यात्मिक वातावरण बना दिया। वृंदावन और मधुवन की भक्ति भावनाओं में रचे-बसे श्रोता श्रीकृष्ण की बांसुरी की धुनों में देर तक मग्न रहे।

श्री सनातन धर्म महासभा के तत्वावधान एवं श्री गोपाल लाल जी मंदिर ट्रस्ट, हनुमानताल और महाकौशल शहीद स्मारक ट्रस्ट के संयोजत्व में शहीद स्मारक प्रेक्षागृह में ‘कान्हा की बांसुरी’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम श्री नृसिंह पीठाधीश्वर पूज्य श्रीमद्जगद्गुरु डॉ. स्वामी नरसिंह देवाचार्य जी महाराज के पावन सानिध्य एवं संरक्षण में संपन्न हुआ।

बांसुरी की स्वर लहरियों ने बांधा समां

कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय ख्यातिलब्ध बांसुरी वादक निरंजन पुरी गोस्वामी और वासु मिथलेश ने विभिन्न रागों में अपनी मनमोहक स्वर कला का प्रस्तुतिकरण किया। बांसुरी वादकों के साथ तबला वादक अंकुर झा की जुगलबंदी ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कलाकारों की प्रस्तुति को उपस्थित दर्शकों ने खूब सराहा।

प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार वितरित

कार्यक्रम के दौरान 29 अगस्त से 1 सितंबर तक आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया। इनमें मटकी सजाओ, श्रीकृष्ण चित्रकारी, बरसाने का मेला, कान्हा झांकी सजाओ, कान्हा की मुरली एवं मुकुट सजाओ प्रतियोगिताएं शामिल थीं।

प्रतियोगिताओं में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कार, नकद राशि एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए। अन्य प्रतिभागियों को सांत्वना पुरस्कार के रूप में प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।

बड़ी संख्या में श्रोता रहे उपस्थित

कार्यक्रम में गिरिराज चाचाजी, अध्यक्ष श्याम साहनी, अशोक मनोध्या, गुलशन मखीजा, लकी भाटिया, जेडीए अध्यक्ष संदीप जैन, पं. रोहित दुबे, पार्षद प्रतिभा भापकर, वाणी अहुलवलिया, गीता पांडे, डॉ. संदीप मिश्रा, गोविंद पाठक, मनोज पटेल, नीरज मिश्रा, प्रवीण चतुर्वेदी, राजेंद्र प्यासी, संजय पटेल, विष्णु पटेल, जगदीश साहू, लोकराम कोरी, आलोक पाठक, राजेश, नेहा जेठा, कविता दुबे, इंदू प्यासी, सोनम सेठी, इंदु साहू, अभिषेक आराध्य सहित बड़ी संख्या में श्रोताओं की उपस्थिति रही।

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