
सबसे ज्यादा दबाव खंडवा ताप विद्युत गृह पर दिखाई दे रहा है। यहां करीब 90 हजार टन कोयला उपलब्ध बताया जा रहा है, जबकि प्रतिदिन लगभग 25 हजार टन ईंधन की आवश्यकता पड़ती है। मौजूदा खपत के हिसाब से यह स्टाक करीब तीन से चार दिन का ही है। 600 मेगावाट की एक इकाई रखरखाव के लिए बंद है, जबकि बाकी तीन इकाइयों से बिजली उत्पादन जारी है।
बारिश में दोगुने से ज्यादा हुआ रैक खाली करने का समय
सूत्रों के अनुसार सामान्य दिनों में कोयले से भरी रेलवे रैक को प्लांट में खाली करने में लगभग चार से पांच घंटे लगते हैं। बारिश के मौसम में कोयले में नमी बढ़ जाने से यही काम 10 से 20 घंटे तक खिंच रहा है। रैक लंबे समय तक खड़ी रहने से उनके दोबारा उपयोग में भी देरी हो रही है।
दूसरी ओर, खदानों में पानी भरने से खनन की गति प्रभावित हो रही है। गीले कोयले के साथ मिट्टी की मात्रा बढ़ने की स्थिति भी सामने आ रही है। इससे ईंधन की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है और समान बिजली उत्पादन के लिए अधिक कोयले की खपत हो सकती है।
अन्य बिजलीघरों में कितने दिन का स्टाक?
प्रदेश के दूसरे ताप विद्युत केंद्रों की स्थिति खंडवा की तुलना में कुछ बेहतर है। बिरसिंहपुर में करीब 71 हजार टन कोयला उपलब्ध है और रोजाना लगभग 18 हजार टन की खपत होती है। यहां मौजूदा भंडार करीब पांच दिन का माना जा रहा है।
सारणी में लगभग 1.07 लाख टन कोयला मौजूद है। वर्तमान में एक इकाई संचालित होने से दैनिक खपत करीब 3500 टन है। इस आधार पर यहां लगभग 15 दिन का स्टाक उपलब्ध है।
अमरकंटक ताप विद्युत गृह में करीब 1.02 लाख टन कोयला है। यहां प्रतिदिन लगभग 2700 टन कोयले की खपत हो रही है। मौजूदा स्थिति में यह स्टाक करीब एक महीने तक चल सकता है।
फ्यूल मैनेजमेंट टीम रख रही नजर
कोयले की आपूर्ति और बिजलीघरों में उपलब्ध भंडार की लगातार समीक्षा की जा रही है। प्लांट में मौजूद ईंधन, रोजाना होने वाली खपत और प्रस्तावित रैक की उपलब्धता को ध्यान में रखकर उत्पादन की योजना बनाई जा रही है।
प्रदेश के ताप विद्युत गृहों को अलग-अलग कोयला खदान क्षेत्रों से आपूर्ति प्राप्त होती है। बारिश के कारण खनन से लेकर रेल परिवहन और प्लांट में अनलोडिंग तक कई स्तरों पर परेशानी सामने आ रही है।
मांग के हिसाब से बदला जा रहा उत्पादन
कोयले के सीमित भंडार के बीच बिजली की मांग को पूरा करने के लिए उत्पादन का समय और लोड भी समायोजित किया जा रहा है। दिन में अपेक्षाकृत कम और रात के समय ज्यादा लोड लेकर बिजली उत्पादन कराया जा रहा है। ताप विद्युत गृहों से फिलहाल करीब 3500 मेगावाट लोड लिया जा रहा है।
कुछ इकाइयों के रखरखाव के चलते पहले से बंद होने के कारण चालू इकाइयों पर अतिरिक्त जिम्मेदारी है। ऐसे में बारिश के दौरान कोयले की आपूर्ति में और देरी हुई तो कम स्टाक वाले बिजलीघरों में उत्पादन व्यवस्था को बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
अब बिजलीघरों की नजर अगली कोयला रैक पर टिकी है। समय पर आपूर्ति बहाल होना ही उत्पादन व्यवस्था पर बढ़ रहे दबाव को कम करने में अहम भूमिका निभाएगा।