
भोपाल। बिना अपॉइंटमेंट के मार्बिज्म अध्यक्ष से नहीं मिला जा सकता। अधिकारियों से मिलते समय गुलदस्ता, स्मृति चिन्ह भेंट नहीं किया जा सकता है। यह आदेश आयुर्वेद, सिद्धा, सोवा-रिग्पा, यूनानी कॉलेजों को मान्यता प्रदान करने संबंधित गहन निरीक्षण से लेकर पाठ्यक्रम निर्धारण आदि के लिये निर्धारित बोर्ड – नेशनल कमीशन फॉर इण्डियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन (एनसीआईएसएम) ने जारी किया है।
मार्बिज्म से जुड़े कार्यों के लिए नियम सख्त
आयुष मंत्रालय भारत सरकार के तहत मेडिकल असिस्मेंट एण्ड रेटिंग बोर्ड फॉर इण्डियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन (मार्बिज्म) से संबंधित कार्यों के लिये नियम सख्त कर दिये गये हैं। बिना अपॉइंटमेंट के मार्बिज्म के अध्यक्ष से नहीं मिला जा सकता है। अगर आवश्यकतावश मिलना भी है तो संबंधित प्रिंसिपल की पहले अनुमति लेकर एनसीआईएसएम से विधिवत अपॉइंटमेंट के बाद ही मिल सकते हैं।
गुलदस्ता व उपहार देना पूर्णतः वर्जित
प्रोटोकॉल के अनुसार अधिकारियों से मिलने पर मुलाकातों व बैठकों के दौरान गुलदस्ते, उपहार, स्मृति चिन्ह या ऐसी कोई भी वस्तु भेंट करना वर्जित कर दिया गया है। आगंतुकों को सत्यापन के लिये वैध संस्थागत या सरकारी पहचान पत्र साथ रखना होगा। उक्त आशय का प्रोटोकॉल पत्र एनसीआईएसएम के सचिव सच्चिदानंद प्रसाद ने जारी किया है।
देशभर के आयुष कॉलेज होंगे प्रभावित
ज्ञात रहे कि भोपाल मध्यप्रदेश, जोधपुर राजस्थान, वाराणसी उत्तरप्रदेश, देहरादून उत्तराखण्ड, पटना बिहार, रायपुर छत्तीसगढ़, नई दिल्ली समेत देशभर में 700 से ज्यादा आयुर्वेद, सिद्धा, यूनानी के मेडिकल कॉलेज संचालित हैं। इनमें डेढ़ लाख से ज्यादा छात्र, 25 हजार से ज्यादा चिकित्सा शिक्षक तथा दो लाख से ज्यादा अन्य कर्मचारीगण कार्यरत हैं, जिन्हें किसी न किसी रूप में कभी न कभी एनसीआईएसएम नई दिल्ली में जाना पड़ता है।
भ्रष्टाचार पर रोक की दिशा में बड़ा कदम
आयुष मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ राकेश पाण्डेय ने कहा कि अब एनसीआईएसएम ने आयुष कॉलेजों के प्राचार्यों को और अधिक सम्मान देते हुए किसी न किसी रूप में भ्रष्टाचार पर रोक लगाने की दिशा में कार्य किया है। सूत्र बताते हैं कि पहले बिना अपॉइंटमेंट के ही लोग सीधे एनसीआईएसएम कार्यालय जाकर अधिकारियों से मिलने पहुंच जाते थे, जिससे आयोग का कार्य प्रभावित होता था और स्टाफ को भी असुविधा होती थी। ऑफिस समय में उपहार या स्मृति चिन्ह देना कानूनन भी उचित नहीं है।
कॉलेजों में गुणात्मक सुधार की उम्मीद
मार्बिज्म एनसीआईएसएम प्रोटोकॉल से कार्यों के प्रति गंभीरता के साथ प्रिंसिपल्स का उत्तरदायित्व व कार्यक्षमता में बढ़ोतरी की गई है। निश्चित रूप से जीरो टॉलरेंस पॉलिसी के पालन के साथ आयुष कॉलेजों में एनसीआईएसएम की सख्ती से गुणात्मक सुधार की उम्मीद है।