दक्षिण पन्ना के जंगल में सुनहरी आभा बिखेरता दुर्लभ पीला पलाश

धरवारा बीट में दिखा अनोखा प्राकृतिक नजारा

पन्ना। दक्षिण पन्ना वन मंडल के सलेहा वन परिक्षेत्र अंतर्गत धरवारा बीट के जंगल इन दिनों अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य से सराबोर नजर आ रहे हैं। यहां दुर्लभ पीले फूलों वाला पलाश वृक्ष अपनी सुनहरी आभा से पूरे वन क्षेत्र को आलोकित कर रहा है।

दुर्लभता ने बढ़ाया आकर्षण

सामान्यतः पलाश के फूल गहरे केसरिया या नारंगी रंग के होते हैं, जिन्हें “जंगल की ज्वाला” के नाम से जाना जाता है। लेकिन धरवारा बीट में खिला यह पीले रंग का पलाश अपनी विशिष्टता के कारण अलग पहचान बना रहा है। इसके कोमल सुनहरे पुष्प हरियाली के बीच सूर्य की किरणों की तरह चमकते हुए मनमोहक दृश्य प्रस्तुत कर रहे हैं।

कैमरे में कैद हुआ अद्भुत दृश्य

प्रकृति संरक्षण कार्यकर्ता अजय चौरसिया ने इस दुर्लभ पलाश को अपने कैमरे में कैद किया है। उनकी यह तस्वीर न केवल एक अनोखी प्राकृतिक घटना को दर्शाती है, बल्कि वन क्षेत्र में किए जा रहे संरक्षण प्रयासों की सफलता की भी सजीव झलक प्रस्तुत करती है।

औषधीय गुणों से भरपूर है पलाश

विशेषज्ञों के अनुसार, पलाश वृक्ष अपने औषधीय गुणों के लिए भी प्रसिद्ध है। इसकी छाल, फूल और बीज आयुर्वेद में उपयोगी माने जाते हैं। त्वचा रोग, पाचन संबंधी समस्याओं और रक्त शुद्धि में इसका उपयोग लंबे समय से किया जाता रहा है। ऐसे में पीले फूलों वाला यह दुर्लभ स्वरूप और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है।

संरक्षण प्रयासों का सकारात्मक परिणाम

वन विभाग द्वारा वर्षों से किए जा रहे संरक्षण, वृक्षारोपण और पर्यावरण संतुलन के प्रयासों का ही परिणाम है कि जंगलों में अब ऐसी दुर्लभ जैव विविधताएं पुनः देखने को मिल रही हैं। धरवारा बीट में खिला यह पीला पलाश केवल एक वृक्ष नहीं, बल्कि प्रकृति का संदेश है कि निरंतर और समर्पित संरक्षण से जंगल अपनी खोई हुई पहचान और रंगत फिर से प्राप्त कर सकते हैं।

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