Guru Purnima 2026: संस्कारधानी जबलपुर की गुरु परंपरा और संतों की दिव्य विरासत

जबलपुर। मनुष्य जीवन से अज्ञानता के अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश लाने वाले गुरु को हमारी संस्कृति में देवतुल्य माना गया है। गुरु केवल ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि जीवन को सही दिशा प्रदान करते हैं। गुरु की कृपा से साधक का जीवन आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर होता है।

गुरु मंत्र से होता है आत्मिक जागरण

हम सभी भक्त गुरु दीक्षा लेकर अध्यात्म की राह पर चल पड़ते हैं। यह यात्रा बाहर की ओर नहीं, बल्कि भीतर की ओर होती है। जब भीतर परिवर्तन होता है तो बाहर का जीवन भी स्वतः बदलने लगता है। गुरु द्वारा दिए गए गुरु मंत्र का जितना अधिक जाप किया जाता है, उतनी ही अद्भुत आध्यात्मिक अनुभूतियां प्राप्त होती हैं।

गुरु मंत्र में समस्त लोकों के देवी-देवता, पितर, कुलदेवी, कुलदेवता, वेद, पुराण, ग्रह-नक्षत्र, संपूर्ण ब्रह्मांड और उसके समस्त ज्ञान का वास माना गया है। शास्त्रों में वर्णित है कि गुरु चरणों में ही सभी तीर्थों, नदियों और सागरों का निवास होता है। इसलिए गुरु के समक्ष सदैव विनम्र और मौन रहना चाहिए। यही ब्रह्म और जीव का मिलन है, जो जीवन के समस्त कार्यों को सिद्ध करता है। जीव जब ईश्वर से एकाकार हो जाता है, तभी उसे वास्तविक मुक्ति प्राप्त होती है।

लेखक: विध्येश भापकर, सरस्वती कॉलोनी चेरीताल वार्ड जबलपुर म प्र

संस्कारधानी की आध्यात्मिक परंपरा

आचार्य विनोबा भावे ने जबलपुर को यूं ही संस्कारधानी नहीं कहा। इस नगरी को अनेक महान संतों और गुरुओं ने अपनी कर्मभूमि बनाया और यहीं से ज्ञान एवं भक्ति का प्रकाश फैलाया।

ऋषि जाबालि अयोध्या से महाराज दशरथ के दरबार से सीधे मां नर्मदा के तट पर आए और यहीं साधना में लीन हो गए। उनके कारण इस नगरी का प्राचीन नाम जाबालिपुरम पड़ा।

महाकौशल कला महाविद्यालय (रॉबर्टसन कॉलेज) के प्राध्यापक आचार्य रजनीश ने भंवरताल उद्यान में ध्यान-साधना कर विश्वविख्यात आध्यात्मिक गुरु के रूप में पहचान बनाई। महर्षि महेश योगी ने भावातीत ध्यान के माध्यम से भारत ही नहीं, विश्वभर में भारतीय अध्यात्म का प्रचार किया।

प्रोफेसर लोकेश जी स्वामी प्रज्ञानंद के रूप में प्रसिद्ध हुए। उन्होंने कटंगी स्थित प्रज्ञाधाम की स्थापना कर ज्ञान की अलख जगाई और अंततः वहीं ब्रह्मलीन हुए।

विश्व के सबसे बड़े स्वामीनारायण संगठन के वर्तमान प्रमुख संत केशवजी का जन्म भी जबलपुर में हुआ। आज उनके जन्मस्थान पर भव्य केशव तीर्थ का निर्माण हो चुका है तथा स्वामीनारायण ट्रस्ट समाज सेवा के अनेक कार्य कर रहा है।

नरसिंह पीठ की गौरवशाली परंपरा

महामंडलेश्वर स्वामी रामचंद्र दास जी महाराज ने जबलपुर में नरसिंह पीठ की स्थापना कर गीता के ज्ञान योग का प्रचार-प्रसार किया तथा जीवनभर सनातन धर्म की सेवा की। लगभग एक शताब्दी से यह पीठ वैदिक परंपराओं के संरक्षण एवं धर्म प्रचार का महत्वपूर्ण केंद्र बनी हुई है।

उनके परम शिष्य जगद्गुरु डॉ. श्याम देवाचार्य जी महाराज ने सनातन धर्म महासभा का गठन कर श्रीकृष्ण जन्माष्टमी एवं रामनवमी की भव्य शोभायात्राओं की परंपरा प्रारंभ की। उन्होंने नर्मदा तट पर श्री गीता धाम की स्थापना कर नर्मदा कुंभ का शुभारंभ किया, जहां देशभर से संत-महात्मा आकर आध्यात्मिक ज्ञान का प्रसार करते हैं।

वर्तमान नरसिंह पीठाधीश्वर जगद्गुरु डॉ. नरसिंह देवाचार्य जी महाराज वैदिक परंपराओं, श्रीमद्भगवद्गीता, रामचरितमानस तथा सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार में निरंतर साधनारत हैं।

अन्य संतों का महत्वपूर्ण योगदान

अखिल विश्व गायत्री परिवार के संस्थापक आचार्य श्रीराम शर्मा एवं वंदनीया भगवती देवी शर्मा अनेक अवसरों पर जबलपुर पधारे। उन्होंने यज्ञ, जप और ज्ञान के माध्यम से वैदिक संस्कृति के प्रसार का कार्य किया। आज भी गायत्री शक्तिपीठ में प्रतिदिन ब्रह्ममुहूर्त से वैदिक अनुष्ठान संपन्न होते हैं।

जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज ने संस्कृत भाषा और सनातन संस्कृति के संरक्षण के लिए उल्लेखनीय कार्य किए। जबलपुर स्थित शंकराचार्य मठ एवं बगलामुखी मंदिर आज भी उनकी परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।

गृहस्थ संत देव प्रभाकर शास्त्री ‘दद्दाजी’ ने करोड़ों शिवलिंग निर्माण महायज्ञ के माध्यम से शिवभक्ति का व्यापक प्रचार किया। उनके द्वारा प्रारंभ किए गए धार्मिक अनुष्ठान आज भी श्रद्धालुओं को प्रेरित कर रहे हैं।

गुरु चरणों में कोटिशः वंदन

जबलपुर में आज भी अनेक संत-महात्मा साधनारत हैं, जिनके आशीर्वाद से लाखों श्रद्धालु आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर रहे हैं। मां नर्मदा की कृपा से यहां ज्ञान और भक्ति की गंगा निरंतर प्रवाहित होती रहती है। महर्षि वेदव्यास के पावन अवतरण दिवस आषाढ़ पूर्णिमा (गुरु पूर्णिमा) के पावन अवसर पर सभी गुरुदेवों के श्रीचरणों में कोटिशः वंदन।

– विध्येश भापकर
विभा विला, सरस्वती कॉलोनी, चेरीताल वार्ड, जबलपुर (मध्यप्रदेश)

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