
जबलपुर। शारदीय नवरात्रि हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसकी शुरुआत आश्विन माह में होती है। इस बार शारदीय नवरात्रि अनेक वर्षों के बाद एक बेहद शुभ संयोग लेकर आ रही है। इन दिनों में मां दुर्गा की उपासना करने का अभूतपूर्व फल मिलेगा। प्रतिपदा से लेकर नवमी तक मां दुर्गा के नौ रूपों की विधिवत पूजा-अर्चना की जाएगी। ज्योतिर्विद एवं वास्तुविद् पंडित सौरभ दुबे ने बताया कि इस बार खास बात यह है कि नवरात्रि 9 दिन की और विजयादशमी 10 दिन का पर्व मनाया जाएगा। इस साल मातारानी का आगमन हाथी पर होने वाला है।

माँ दुर्गा की सवारी
मां दुर्गा का हाथी पर सवार होकर आना अत्यंत शुभ माना गया है। हिंदू धर्म में हाथी को ऐश्वर्य, शांति और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। यह विश्वास है कि जब मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आती हैं, तो मौसम अनुकूल रहता है, अन्न-धान्य की वृद्धि होती है और कृषि क्षेत्र में प्रगति देखने को मिलती है। चारों ओर सुख-समृद्धि का वातावरण बना रहता है। भक्तों के लिए यह सुख और संपन्नता का संकेत माना जाता है। इस साल अच्छी बारिश होगी और खेती भी बहुत अच्छी होगी। साथ ही देश में अन्न के भंडार भरे रहेंगे और सुख-समृद्धि आएगी, परंतु प्राकृतिक आपदा और भय की स्थिति भी रहेगी।
शशि सूर्य गजरुढा शनिभौमै तुरंगमे।
गुरौशुक्रेच दोलायां बुधे नौकाप्रकीर्तिता॥
ज्योतिर्विद एवं वास्तुविद् पंडित सौरभ दुबे के अनुसार 11 अक्टूबर को प्रतिपदा से नवरात्र की शुरुआत होगी और 19 अक्टूबर, सोमवार को महा नवमी के साथ इसका समापन होगा। इसके अगले दिन, 20 अक्टूबर मंगलवार को विजयादशमी मनाई जाएगी।
नवरात्रि पर इस साल चित्रा नक्षत्र, कन्या एवं तुला राशि का संयोग बन रहा है। यह एक शुभ संयोग माना जाता है, जिसके कारण पूजा का विशेष फल मिलेगा। सर्वार्थसिद्धि योग एवं रवियोग का संयोग सभी भक्तों को उत्तम फलदायी रहेगा।
नवरात्रि में दो सोमवार का महत्व
9 दिन की नवरात्रि में दो सोमवार आ रहे हैं। यह अत्यंत शुभ संयोग है, क्योंकि सोमवार को दुर्गा पूजा का हजार, लाख गुना नहीं बल्कि करोड़ गुना फल मिलता है।
माँ दुर्गा का प्रस्थान
विजयादशमी मंगलवार, 20 अक्टूबर, दशमी तिथि पर माँ दुर्गा की सवारी मनुष्य का कंधा माना गया है। यह शुभ फलदायक होती है।
घट स्थापना एवं जवारा के शुभ मुहूर्त
घट स्थापना एवं जवारा प्रातः काल से ही रखना प्रारंभ होंगे, परंतु नवरात्र में कुछ विशेष मुहूर्त में यह स्थापना करने से माता अपनी कृपा की वर्षा करती हैं। प्रातः 6:17 से 9:26 तक, 9:34 से 11:39 प्रातः तक, 1:44 से 3:31 दोपहर तक, 5:04 शाम से 6:35 शाम तक और 8:15 से 10:14 रात तक स्थापना का शुभ मुहूर्त रहेगा।
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