
जबलपुर। भगवान की कथा के श्रवण मात्र से जीव का परम कल्याण हो जाता है। नवधा भक्तियों में श्रवण भक्ति को आचार्यों ने सर्वश्रेष्ठ माना है – “श्रवणं सर्व धर्मेभ्यो वरं मन्ये तपोधनाः”।
श्रवण भक्ति से मिलता है मोक्ष
अतः इस श्रवण मार्ग का आश्रय लेकर राजा परीक्षित ने मोक्ष को प्राप्त किया। महाराज श्री ने अपने भावपूर्ण प्रवचन में भगवान की करुणा, कृपा और भक्तों पर उनके अनुग्रह का विस्तृत वर्णन किया।

कुंती और भीष्म की स्तुति का उल्लेख
प्रवचन के दौरान माता कुंती द्वारा की गई स्तुति और भीष्म पितामह के द्वारा की गई स्तुति का उल्लेख करते हुए बताया कि इन सभी ने भगवान से एक ही वरदान मांगा कि उनका मन सदैव भगवान के चरणों में लगा रहे।
राजा परीक्षित के जीवन प्रसंग का वर्णन
महाभागवत परीक्षित जी ने सात दिनों तक श्रीमद्भागवत का श्रवण किया। उनके जन्म, राज्य विस्तार और जीवन से जुड़े प्रसंगों का भी विस्तार से वर्णन किया गया।
भागवत कथा में दिया गया संदेश
उक्त उद्गार श्रीमद् जगतगुरु नरसिंह पीठाधीश्वर डॉक्टर स्वामी नरसिंह देवाचार्य जी महाराज ने व्यक्त किए। वे श्री आदर्श केशरवानी वैश्य समाज संगठन द्वारा 14 मई से 21 तक आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के द्वितीय दिवस श्रीमद् भागवत महापुराण में दुर्गा मंदिर कैलाशपुरी हाथीताल जबलपुर में संबोधित कर रहे थे।
व्यास पीठ पूजन और आरती
इस अवसर पर श्रीमद्भागवत महापुराण में व्यास पीठ का पूजन-अर्चन एवं आरती यजमान कर्पूरचंद्र केशरवानी सहित श्री हरिबंश निर्मला गुप्ता, प्रशांत गुललन दुबे, पार्षद निशा राठौर, नारायण, शान्ती गुप्ता, श्रीहरी शंकर, कान्ती देवी गुप्ता, कुंजबिहारी गुप्ता, हिन्छलाल गुप्ता, शिवदीन गुप्ता (ज्ञानी), रामरूप, कन्हैया लाल गुप्ता, मूलचन्द्र गुप्ता, केदारनाथ गुप्ता, रामदिनेश सेन एवं श्रीमती सुभद्रा सेन ने किया।