भक्तमाल कथा में हरिराम व्यास जी की भक्ति और श्री जुगल किशोर सरकार की अलौकिक लीलाएं

राकेश कुमार शर्मा

पन्ना। श्री जुगल किशोर सरकार सप्तनिधि धाम, पन्ना में आयोजित दिव्य श्री भक्तमाल कथा महोत्सव के तीसरे दिन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास का अनुपम वातावरण देखने को मिला। कथा का शुभारंभ पूर्व मंत्री एवं पन्ना विधायक बृजेंद्र प्रताप सिंह ने भगवान श्री जुगल किशोर सरकार की विधिवत आरती एवं पूजन-अर्चन कर किया। इसके पश्चात परमपूज्य रसिकाचार्य महंत श्री श्री 108 स्वामी किशोर दास जी महाराज ने अपने श्रीमुख से भक्तमाल कथा का अमृतमय प्रवचन प्रस्तुत किया।

हरिराम व्यास जी के दिव्य जीवन का प्रेरक वर्णन

अपने प्रवचन में पूज्य गुरुदेव ने भगवान श्री जुगल किशोर सरकार को प्रकट करने वाले महान संत, भक्त शिरोमणि एवं रसिकाचार्य पंडित हरिराम व्यास जी महाराज के दिव्य एवं अलौकिक जीवन चरित्र का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि हरिराम व्यास जी का जन्म बुंदेलखंड के ओरछा राज्य में राजपुरोहित समोखन शुक्ल के पुत्र के रूप में हुआ था। बाल्यकाल से ही वे विलक्षण प्रतिभा के धनी थे। उनकी अद्वितीय विद्वता के कारण वे अनेक राज्यों के राजपुरोहित बने तथा काशी के विद्वानों के साथ शास्त्रार्थ कर अपनी विद्वता का लोहा मनवाया।

कथा के अनुसार, भगवान शिव ने प्रकट होकर उन्हें बताया कि वे श्रीराधारानी की परम सखी विशाखा जी के अवतार हैं तथा उनका अवतरण भगवान श्री श्याम जुगल किशोर सरकार को प्रकट करने के लिए हुआ है।

वृंदावन की तपस्या और श्री जुगल किशोर सरकार का प्राकट्य

पूज्य महाराज ने बताया कि इसके पश्चात हरिराम व्यास जी वृंदावन पहुंचे, जहां उन्होंने कठोर तपस्या, अनन्य भक्ति और प्रेममयी साधना के बल पर भगवान श्री श्याम जुगल किशोर सरकार को प्रकट किया। कालांतर में वही श्री जुगल किशोर सरकार सप्तनिधि धाम, पन्ना पधारे और आज भी अपने भक्तों पर कृपा बरसाकर इस पावन भूमि को धन्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पन्ना को वृंदावन जैसी आध्यात्मिक गरिमा प्रदान करने का श्रेय हरिराम व्यास जी की निष्काम भक्ति और तपस्या को जाता है।

जरकसी पगड़ी की अलौकिक लीला ने किया भाव-विभोर

प्रवचन के दौरान पूज्य किशोर दास जी महाराज ने हरिराम व्यास जी और ठाकुर श्री जुगल किशोर सरकार की एक अत्यंत मार्मिक एवं अलौकिक लीला का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि एक बार हरिराम व्यास जी प्रेमपूर्वक ठाकुर जी का दिव्य श्रृंगार कर रहे थे। वे उन्हें सुंदर जरकसी पगड़ी पहनाने का प्रयास कर रहे थे, किंतु बार-बार पगड़ी उनके मस्तक से खुलकर गिर जाती थी।

कई प्रयासों के बाद व्यास जी प्रेमवश बोले, “यदि तुम्हें मेरी बांधी हुई पगड़ी पसंद नहीं आती, तो तुम स्वयं ही इसे बांध लो।” इतना कहकर वे मंदिर से बाहर चले गए।

कुछ समय बाद जब वे लौटे तो देखा कि ठाकुर श्री जुगल किशोर सरकार ने स्वयं अपने कर-कमलों से अत्यंत सुंदर ढंग से पगड़ी धारण कर रखी है और उनके श्रीमुख पर मनमोहक मुस्कान विराजमान है। इस अद्भुत दृश्य को देखकर हरिराम व्यास जी की आंखों से प्रेमाश्रु बह निकले और वे प्रभु के चरणों में नतमस्तक हो गए।

निष्कलुष प्रेम से प्रसन्न होते हैं भगवान

पूज्य गुरुदेव ने कहा कि भगवान को बाहरी आडंबर नहीं, बल्कि भक्त का निष्कलुष प्रेम, सेवा और पूर्ण समर्पण प्रिय है। जहां सच्ची श्रद्धा और प्रेम होता है, वहां भगवान स्वयं अपने भक्त की लाज रखने के लिए प्रकट होकर लीला करते हैं। हरिराम व्यास जी का जीवन हमें निष्काम भक्ति, विनम्रता और अटूट विश्वास का संदेश देता है।

भक्ति और जयघोषों से गूंज उठा कथा पंडाल

कथा के दौरान संपूर्ण पंडाल भक्तिरस में सराबोर रहा। हरिराम व्यास जी के दिव्य चरित्र और ठाकुर श्री जुगल किशोर सरकार की अलौकिक लीलाओं का श्रवण कर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। अंत में भगवान श्री जुगल किशोर सरकार की महाआरती संपन्न हुई। श्रद्धालुओं ने धर्म, राष्ट्र, समाज एवं विश्व कल्याण की मंगलकामना करते हुए जयघोषों के साथ पूरे परिसर को भक्तिमय बना दिया।

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