तीखी बात: सीजेपी के आंदोलन से मिली विपक्ष को संजीवनी!

राजीव उपाध्याय

राजनीति में जब नेता और उनकी पार्टी हाशिये पर चली जाती हैं तो उनके लिए सवाल उनके अस्तित्व का बन जाता है। अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी आम आदमी पार्टी पिछले कुछ समय से हाशिये पर चल रही थी। कॉक्रोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आंदोलन से इनके राजनीतिक अस्तित्व को संजीवनी मिल गई है। सीजेपी का यह आंदोलन इतिहास में दर्ज किया जाएगा। एनडीए की सरकार में किसी मंत्री का इस्तीफा होना बहुत बड़ी बात है, लेकिन सीजेपी ने यह कर दिखाया।

सीजेपी के साथ जिस तरह से देशभर के छात्रों का समर्थन था, उसने सरकार को झुका दिया और सरकार ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे समेत तीनों मांगों को मान लिया है। यह बहुत बड़ी बात है कि जेन-जी ने वो कर दिखाया जिसकी उम्मीद विपक्षी पार्टियों को भी नहीं थी। हालांकि विपक्षी पार्टियां यह जानती थीं कि सरकार दो मांगों को तो मान जाएगी, लेकिन धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के लिए शायद ही तैयार हो क्योंकि यह सरकार की प्रतिष्ठा का सवाल था। लेकिन केंद्र सरकार ने भी जेन-जी की ताकत देख ली, जिससे यह अहसास उसे हो गया कि यह बहुत बड़ा वोट बैंक है जिसे नाराज नहीं किया जा सकता। क्योंकि जो जेन-जी सामने दिख रहे हैं केवल वही नहीं, बल्कि इसमें वह संख्या भी शामिल है जो सामने नहीं दिख रही है, जो मैदान में नहीं आई है।

वह घर में बैठकर सरकार की गतिविधियों का अवलोकन कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रात 12.30 बजे नेशनल टीवी पर नहीं बल्कि सोशल मीडिया पर वीडियो जारी करना यह प्रतीत कराता है कि उनको युवाओं की चिंता है। वे जानते हैं कि जेन-जी सोशल मीडिया पर ही मिलेंगे। इसके बाद धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भी यह दिखाता है कि सरकार को जेन-जी के आंदोलन की ताकत का अहसास हो गया है। लेकिन यह अहसास सरकार को देर से हुआ, वहीं आम आदमी पार्टी, कांग्रेस, सपा ने इसे पहले से भांप लिया था।

सीजेपी प्रमुख अभिजीत दिपके का संबंध पहले से आम आदमी पार्टी के साथ था, जिससे इस आंदोलन में आप के नेता सीजेपी के काफी नजदीक रहे। अरविंद केजरीवाल ने जब सीजेपी के साथ जेन-जी की भीड़ देखी तो इस हद तक सीजेपी को सपोर्ट किया, जिससे जेन-जी को लगा कि वे उसके साथ हमेशा खड़े हैं। आंदोलन के दौरान अरविंद केजरीवाल, संजय सिंह, आतिशी ने दिल्ली के हर थाने में जाकर छात्रों के खिलाफ दर्ज मामले समाप्त करने के लिए बहुत ही नम्रता के साथ बात की। यहां तक कि छात्रों को अपना अभिभावक की तरह बताया और मामले खत्म करने की रिक्वेस्ट की।

यह उन्होंने पूरे आंदोलन के दौरान किया, जिससे उनकी जमीन एक बार फिर तैयार हो गई। वहीं कांग्रेस को भी लगा कि राहुल गांधी तो नीट का मुद्दा बहुत पहले से उठा रहे हैं, लेकिन सीजेपी के आंदोलन और उसके साथ आम आदमी पार्टी के सपोर्ट ने कांग्रेस को पीछे कर दिया। जिससे राहुल गांधी जंतर-मंतर पर नहीं गए, लेकिन अपना सपोर्ट जेन-जी के साथ दिखाया और पीएम आवास के सामने धरना दे दिया। उनके साथ समाजवादी पार्टी भी शामिल रही।

विपक्षी पार्टी आप, कांग्रेस, सपा सभी यह दिखाने में पीछे नहीं हटे कि वे छात्रों के साथ हैं, उनका वे पूरा सपोर्ट कर रहे हैं। विपक्षी पार्टियों ने छात्रों की बनाई जमीन पर अपना राजनीतिक अस्तित्व खड़ा करने में कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी। जो मांगें छात्रों की थीं, उन्हीं मांगों को इन विपक्षी पार्टियों ने दोहराया ताकि जब छात्रों की मांगें पूरी होंगी तो अप्रत्यक्ष रूप से उनकी उपस्थिति भी इस आंदोलन में दर्ज हो जाएगी। इस आंदोलन का परिणाम ऐतिहासिक रहा। छात्रों के पक्ष में सरकार झुक गई। वहीं विपक्षी पार्टियों को भी यह आंदोलन संजीवनी दे गया।

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