ध्रुव चरित्र और नारायण भक्ति की महिमा से गूंजा गीता धाम, भक्त हुए भावविभोर

जबलपुर। श्रावण मास के पावन अवसर पर गौरीघाट स्थित गीता धाम में आयोजित श्रीमद् भागवत महापुराण कथा के तृतीय दिवस भक्ति, श्रद्धा और भगवान के प्रति अटूट विश्वास का संदेश गूंजता रहा। श्रीमद् जगतगुरु नृसिंह पीठाधीश्वर डॉ. स्वामी नृसिंहदेवाचार्य जी महाराज ने श्रीमद्भागवत के दिव्य प्रसंगों का रसपान कराते हुए श्रद्धालुओं को भगवान की भक्ति और दृढ़ संकल्प के महत्व से अवगत कराया।

कथा के तृतीय दिवस विशेष रूप से ध्रुव चरित्र का अत्यंत मार्मिक एवं प्रेरणादायी प्रसंग सुनाया गया। महाराज श्री ने बालक ध्रुव की अटूट भक्ति, दृढ़ संकल्प और तपस्या का वर्णन करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद ध्रुव ने भगवान श्रीहरि की भक्ति का मार्ग नहीं छोड़ा। अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और कठोर तपस्या के बल पर उन्होंने भगवान नारायण को प्रसन्न किया और दिव्य दर्शन प्राप्त किए।

ध्रुव की भक्ति से मिलता है दृढ़ संकल्प का संदेश

महाराज श्री ने कहा कि बालक ध्रुव का जीवन प्रत्येक व्यक्ति के लिए प्रेरणा का स्रोत है। जीवन में परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि मनुष्य अपने लक्ष्य के प्रति दृढ़ निश्चय रखे और भगवान के प्रति अटूट श्रद्धा बनाए रखे तो वह कठिन से कठिन लक्ष्य को भी प्राप्त कर सकता है। ध्रुव ने कम उम्र में जिस प्रकार तपस्या और भक्ति का मार्ग अपनाया, वह यह बताता है कि ईश्वर की प्राप्ति के लिए उम्र नहीं, बल्कि मन की सच्चाई और दृढ़ विश्वास आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि भगवान की भक्ति के लिए किसी विशेष आयु की आवश्यकता नहीं होती। बालक ध्रुव ने अपने निष्कपट भाव और दृढ़ संकल्प से यह सिद्ध किया कि सच्ची श्रद्धा के सामने परिस्थितियां बाधा नहीं बन सकतीं। जिस हृदय में भगवान के प्रति निष्कपट प्रेम और विश्वास होता है, वहां भगवान स्वयं कृपा करने के लिए उपस्थित होते हैं।

उत्तानपाद, सुनीति और सुरुचि के प्रसंग ने किया भाव-विभोर

कथा के दौरान राजा उत्तानपाद, माता सुनीति, सुरुचि तथा बालक ध्रुव से जुड़े प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया गया। महाराज श्री ने ध्रुव के जीवन में आए संघर्षों और उनके मन में उत्पन्न हुए संकल्प का वर्णन करते हुए बताया कि किस प्रकार बालक ध्रुव ने विपरीत परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य से मुंह नहीं मोड़ा।

ध्रुव की तपस्या और भगवान श्रीहरि के दिव्य दर्शन का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। कथा स्थल पर उपस्थित भक्तों ने भगवान नारायण की महिमा का श्रवण करते हुए भक्ति भाव से उनका स्मरण किया। ध्रुव चरित्र के माध्यम से श्रद्धालुओं को यह संदेश मिला कि भगवान के प्रति सच्ची आस्था और समर्पण जीवन की कठिन परिस्थितियों में भी मनुष्य को आगे बढ़ने की शक्ति प्रदान करता है।

भक्ति के लिए उम्र नहीं, सच्चे भाव की आवश्यकता

जगतगुरु डॉ. स्वामी नृसिंहदेवाचार्य जी महाराज ने कहा कि भगवान की भक्ति में उम्र कोई बाधा नहीं है। आवश्यक है तो केवल सच्चा भाव, निष्कपट श्रद्धा और दृढ़ विश्वास। जब भक्त अपने मन को भगवान के चरणों में समर्पित कर देता है तो भगवान भी उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर कृपा करते हैं।

उन्होंने श्रद्धालुओं को भगवान के नाम का निरंतर स्मरण करने और जीवन में भक्ति को स्थान देने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सांसारिक जीवन में आने वाली कठिनाइयों से घबराने के बजाय भगवान पर विश्वास रखते हुए अपने कर्तव्य और साधना के मार्ग पर आगे बढ़ना चाहिए।

भजनों और जयकारों से भक्तिमय हुआ गीता धाम

कथा के दौरान भजनों और भगवान के जयकारों से पूरा गीता धाम गौरीघाट भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने भाव-विभोर होकर श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण किया और भगवान के नाम का संकीर्तन किया। कथा स्थल पर भक्ति और आध्यात्मिकता का वातावरण बना रहा।

श्रद्धालु कथा के विभिन्न प्रसंगों में भावनात्मक रूप से जुड़े नजर आए। भगवान नारायण की महिमा, ध्रुव की तपस्या और उनकी अटूट भक्ति का वर्णन सुनकर भक्तों ने श्रद्धापूर्वक भगवान का स्मरण किया।

मुख्य यजमान सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित

श्रीमद् भागवत महापुराण कथा के अवसर पर व्यास पीठ का पूजन-अर्चन मुख्य यजमान संजय वर्मा द्वारा किया गया। इस अवसर पर राजेंद्र श्रीवास्तव, प्रशांत, कुशाग्र, आकांक्षा, अनुश्री, अदिति, अनुष्का, शकुंतला, संगीता, अपर्णा, राकेश श्रीवास्तव, योगेश श्रीवास्तव, अमित वर्मा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं भक्तजन उपस्थित रहे।

कथा के तृतीय दिवस श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीहरि की भक्ति, ध्रुव चरित्र और नारायण भक्ति की महिमा का श्रवण किया। आयोजन के दौरान गीता धाम में लगातार भक्तिमय वातावरण बना रहा और श्रद्धालुओं ने भगवान के नाम संकीर्तन के साथ आध्यात्मिक आनंद का अनुभव किया।

Back to top button