
जबलपुर: डॉ श्यामाप्रसाद मुखर्जी की भूमि केसरिया रंग से 4 मई को सराबोर हो गई। पश्चिम बंगाल में भाजपा की सुनामी ने दीदी की पिछले 15 साल से चली आ रही आंधी को थाम दिया। पश्चिम बंगाल में शाम 5 बजे तक आए रुझानों के अनुसार भाजपा 189 सीटों पर आगे चल रही है। वहीं टीएमसी 88 सीटों पर आगे है। पश्चिम बंगाल में भाजपा की पहली बार सरकार बनने जा रही है। पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत ने इतिहास रच दिया है।
भाजपा की रणनीति से खुले जीत के द्वार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का यह स्वप्न रहा है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बने। इसके लिए अमित शाह ने अपने विश्वसनीय सुनील बंसल को पश्चिम बंगाल का प्रभारी बनाया। सुनील बंसल चुनाव के अच्छे रणनीतिकार हैं। वे पिछले 6 माह से पश्चिम बंगाल में रहकर वहां चुनाव की रणनीति बना रहे थे।
इसका फीडबैक वे अमित शाह को देते थे। हालांकि भूपेंद्र यादव भी उनके साथ थे लेकिन मुख्य रूप से सुनील बंसल ने चुनाव की बागडौर संभाली थी। उन्होंने दोनों चरणों के चुनाव की पूरी तैयारी की थी। भाजपा में खास बात यह है कि इनका संगठन बहुत मजबूत है। इससे किसी भी राज्य में चुनाव हों, इसके बेहतर परिणाम भाजपा को मिल रहा है।
वहीं अमित शाह ने फ्रंट फुट पर आकर चुनाव को केंद्रित किया। वे लगातार पश्चिम बंगाल में रहे और पल-पल की अपडेट लेते रहे और उस पर सकारात्मक काम करने का निर्देश देते रहे।
भाजपा के लिए बड़ा मौका
बीजेपी पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बन रही है। इस चुनाव को इतिहास में भाजपा का चुनाव लड़ने की रणनीति को याद किया जाएगा।
टीएमसी एसआइआर में उलझ गई
टीएमसी ने पूरे चुनाव में एसआइआर को मुद्दा बनाना चाहा लेकिन वह उसमें उलझकर रह गई। टीएमसी अपने विजन को लोगों तक नहीं पहुंचा पाई। पूरे चुनाव में जनता के हित से जुड़े मुद्दों को टीएमसी नहीं बता पाई।
कड़ी सुरक्षा के बीच चुनाव
पश्चिम बंगाल भाजपा के लिए कड़ी परीक्षा रही है। वहीं टीएमसी सुप्रीमो ममता बैनर्जी के लिए भी कड़ी चुनौती रही। चुनाव आयोग ने जिस तरह से पूरी फोर्स लगाकर यह चुनाव करवाया, ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। हालांकि इसका परिणाम बेहतर ही रहा। जिससे छुटपुट घटनाओं को छोड़कर कोई हिंसा नहीं हुई। इस तरह की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था में चुनाव, टीएमसी ने पहली बार लड़ा।
ये था इस चुनाव में खास
– आजादी के बाद किसी राज्य में सर्वाधिक मतदान।
– पहली बार किसी राज्य में चुनाव पर सर्वाधिक सुरक्षा बलों की तैनाती।
– पश्चिम बंगाल में चुनाव में हिंसा नहीं हुई।
– मतदाता ने बिना डरे मतदान किया।
– पहली बार भाजपा की सरकार बन रही है।
– टीएमसी की 15 साल की एंटी इंकंबंसी का प्रभाव।
– महिला वोटर्स का ट्रेंड
– पश्चिम बंगाल में पहले व दूसरे फेस का कुल मतदान 92.93 % रहा। जिसमें दोनों चरणों में महिला वोटर्स का कुल मतदान 93.28 % व पुरुष वोटर्स का कुल मतदान 91.75 % रहा। यानी महिलाओं ने पुरुषों से करीब डेढ़ प्रतिशत अधिक मतदान किया। महिलाओं का यह बढ़ा हुआ यह वोट प्रतिशत भी किसी हद तक भाजपा की जीत के लिए सहयोगी रहा।