
जबलपुर। ढाक की गूंज, हाथों में धुनुची लिए नृत्य करते पुरुष, महिलाएं और बच्चे, पारंपरिक बंगाली परिधान, लोक नृत्य और कला का अद्भुत संगम—यह दृश्य मानो पश्चिम बंगाल ही जबलपुर की सड़कों पर उतर आया हो। सिटी बंगाली क्लब और सिद्धी बाला बोस लाइब्रेरी एसोसिएशन द्वारा आयोजित शताब्दी दुर्गा पूजा उत्सव 2025 की विसर्जन शोभा यात्रा में बंगाल की समृद्ध सांस्कृतिक झलक देखने को मिली।
ढाक की ताल पर मां दुर्गा को दी गई विदाई
दशमी के दिन सुबह 10:30 बजे से सिंदूर उत्सव का शुभारंभ हुआ। सफेद साड़ी में लाल किनारे वाली पारंपरिक बंगाली वेशभूषा में सजी हजारों महिलाएं पूजा की थाली लिए कतारबद्ध होकर मां दुर्गा का वरण करने पहुंचीं। इसके बाद महिलाओं ने एक-दूसरे के साथ सिंदूर खेला और ढाक की ताल पर हाथों में धुनुची लेकर पारंपरिक नृत्य करते हुए मां को विदाई दी।
छाऊ नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति
दोपहर 3:30 बजे पश्चिम बंगाल के पुरुलिया से आए कलाकारों ने प्रसिद्ध लोकनृत्य ‘छाऊ’ की प्रस्तुति दी। कलाकारों ने मां दुर्गा, शेर, भगवान गणेश, लक्ष्मी, सरस्वती, कार्तिकेय और महिषासुर के रूप धारण कर युद्ध दृश्य को जीवंत किया। अंत में मां दुर्गा द्वारा महिषासुर वध का दृश्य दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर गया।

विसर्जन शोभा यात्रा में उमड़ा जनसैलाब
छाऊ नृत्य के बाद विसर्जन शोभा यात्रा आरंभ हुई। ढाकियों की ताल और कासोर की धुन पर महिलाएं शंख बजाते, ऊलू ध्वनि करते हुए नृत्य कर रही थीं। शोभा यात्रा करमचंद चौक, राजीव चौक, तीन पत्ती से गुजरते हुए निकली। छाऊ दल ने इन सभी स्थानों पर अपनी प्रस्तुति से लोगों का मन मोह लिया। पुराने बस स्टैंड से वाहनों में सवार होकर विसर्जन कुंड गौरीघाट में मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया।

कई समितियों की भागीदारी और विशेष उपस्थिति
इस भव्य शोभा यात्रा में व्हीकल फैक्टरी दुर्गा पूजा समिति, सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति महाराजपुर और माचा दुर्गा पूजा समिति सहित अन्य समितियों ने भाग लेकर आयोजन की शोभा बढ़ाई। आयोजन में सुब्रत पाल, प्रकाश साहा, सुरजीत गुहा, श्यामल मुखर्जी, डी. के. रॉय, दीपांकर बैनर्जी, सुरेन्द्र पाल, तृष्णा चटर्जी, रूपांजलि बैनर्जी, आशीष घोष, अनुराग पाल, आशीष सेन, आर. एन. दत्ता, नीलाद्री चटर्जी, मुकुल घोष, शेखर डे, सौरभ सोम, चंदन कारफोर्मा, विश्वजीत घोष, आई. बी. रुद्रा, संगीता भद्रा, विजय भट्टाचार्य, सुब्रत रौराना भट्टाचार्य, अभिजीत भौमिक, सौरभ चटर्जी, देवजय मुंशी आदि विशेष रूप से शामिल थे।