
पारंपरिक कला और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ना रहा उद्देश्य
कार्यशाला का उद्देश्य छात्राओं को पारंपरिक कला और संस्कृति से जोड़ने के साथ गणेश प्रतिमा निर्माण की ऐसी तकनीकों से परिचित कराना था, जिनसे पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे। कार्यशाला में तैयार प्रतिमाओं के माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और पर्यावरण हितैषी धार्मिक आयोजनों का संदेश दिया गया।
प्रकृति और आस्था के बीच संतुलन का संदेश
प्रदर्शनी के माध्यम से छात्राओं में भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों की समझ विकसित करने का प्रयास किया गया। आयोजकों के अनुसार धार्मिक आस्था और पर्यावरण संरक्षण को एक-दूसरे का पूरक बनाते हुए इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमाओं के निर्माण को बढ़ावा दिया जा सकता है।
प्रदर्शनी में दिखा छात्राओं का शिल्प कौशल
प्रदर्शनी में छात्राओं द्वारा तैयार की गई विभिन्न आकार और स्वरूप की गणेश प्रतिमाओं में उनकी कल्पनाशीलता और शिल्प कौशल दिखाई दिया। अलग-अलग रूपों में तैयार प्रतिमाओं ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। कार्यशाला के माध्यम से यह संदेश देने का भी प्रयास किया गया कि कला केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं है, बल्कि इसके जरिए समाज में पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश भी प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सकता है।
रचनात्मक कला से स्वरोजगार की संभावनाओं पर जोर
कार्यक्रम में छात्राओं को प्रतिमा निर्माण एवं अन्य रचनात्मक कलाओं के माध्यम से स्वरोजगार की संभावनाओं से परिचित कराने पर भी जोर दिया गया। आयोजकों के अनुसार पर्यावरण अनुकूल उत्पादों की मांग बढ़ने के साथ कला एवं शिल्प से जुड़ी गतिविधियां युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर उपलब्ध करा सकती हैं। इस तरह की कार्यशालाएं छात्राओं को अपनी रचनात्मक प्रतिभा को व्यावसायिक रूप देने के लिए प्रेरित कर सकती हैं।
प्राचार्य एवं प्रशासनिक अधिकारी ने किया उद्घाटन
गणेश प्रतिमा प्रदर्शनी का उद्घाटन महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. सुनीता मिश्रा एवं प्रशासनिक अधिकारी डॉ. मनोज प्रियदर्शन ने किया। उन्होंने प्रदर्शनी का अवलोकन कर छात्राओं द्वारा तैयार की गई प्रतिमाओं की सराहना की। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की रचनात्मक गतिविधियों को शिक्षा के साथ जोड़ना उनके व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
चित्रकला विभाग और शिल्प सृजन समूह का विशेष योगदान
कार्यक्रम में चित्रकला विभाग की वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. सुनीति सेन, डॉ. अरुणा, डॉ. रागिनी उपाध्याय, डॉ. आशीष बतोसिया सहित शिल्प सृजन समूह की मोहिता पासी, नम्रता तिवारी, पूजा सैनी, शिवानी साहू, कीर्ति यादव, तान्या भंडारी, प्रज्ञा मोदी एवं रूपल वरमैया का विशेष योगदान रहा।
पर्यावरण अनुकूल गणेशोत्सव का दिया संदेश
प्रदर्शनी के माध्यम से महाविद्यालय ने गणेशोत्सव को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए छात्राओं की कला प्रतिभा को मंच प्रदान किया। छह दिनों की कार्यशाला में तैयार प्रतिमाओं का प्रदर्शन कला एवं संस्कृति के साथ लोगों को पर्यावरण अनुकूल धार्मिक आयोजनों के प्रति जागरूक करने का माध्यम भी बना।