
जबलपुर। नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल अस्पताल में जुड़वा बच्चों के जटिल एवं दुर्लभ ऑपरेशन का पहला चरण सफल हुआ। डॉक्टरों के अनुसार यह स्थिति लाखों में एक मामले में देखने को मिलती है। मेडिकल अस्पताल के पीडियाट्रिक विभाग में डॉक्टरों की टीम ने यह सफल ऑपरेशन किया।
जुड़वा जीवान और युवान को अलग करना बहुत अधिक आवश्यक है, ताकि वे बेहतर जिंदगी जी सकें। सर्जरी में टीम का नेतृत्व पीडियाट्रिक सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. विकेश अग्रवाल तथा डॉ. हिमांशु आचार्य ने किया। एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. आशीष सेठी के नेतृत्व में दो सर्जिकल व एनेस्थीसिया टीमें गठित की गईं।
क्यों जटिल है यह केस
डॉक्टरों के अनुसार इस तरह की स्थिति लाखों में एक मामले में देखने को मिलती है। इसका कारण यह है कि शिशुओं की निचली आंत्र और मूत्र प्रणाली का आपस में जुड़ा होना है। ऑपरेशन के दौरान दो अलग-अलग सर्जिकल टीमें, दो एनेस्थीसिया टीमें, दो सेट एनेस्थीसिया मशीनें, दो वेंटिलेटर, दो मॉनिटरिंग सिस्टम लगाए गए। अन्य उपकरणों के भी दो-दो सेट की व्यवस्था की गई।
इसलिए जरूरी है ऑपरेशन
मेडिकल अस्पताल में सोमवार को जटिल ऑपरेशन का पहला चरण पूरा हुआ। यह ऑपरेशन दो जुड़वा बच्चों जीवान व युवान का हुआ। जुड़वा बच्चे पेल्विस के स्तर पर आपस में जुड़े हैं। ऑपरेशन के पहले चरण में वेस्टेज को बाहर करने वाली नली रेक्टम और एनस को अलग किया गया। पूरी तरह से दोनों बच्चों को अलग करने के लिए कई स्टेज के ऑपरेशन किए जाएंगे।
लगातार की जा रही मॉनीटरिंग
डॉक्टरों का कहना है कि जुड़वा शिशुओं की लगातार मॉनीटरिंग की जा रही है। जीवान को इंफेक्शन अधिक है। हृदय संबंधी विकार की आशंका के मद्देनजर भी टेस्ट किए जा रहे हैं। जुड़वा शिशुओं को एनआईसीयू में रखा गया है।