दक्षिण पन्ना में 1353 विशिष्ट वृक्षों का सर्वे, अनोखा दस्तावेज तैयार

राकेश कुमार शर्मा

पन्ना। दक्षिण पन्ना वनमंडल ने जिले की प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक धरोहर स्वरूप विशिष्ट वृक्षों के संरक्षण और अभिलेखन की दिशा में एक अभिनव पहल करते हुए “इन्क्रेडिबल ट्रीज़ ऑफ साउथ पन्ना” नामक विस्तृत दस्तावेज़ तैयार किया है। इस महत्वाकांक्षी सर्वेक्षण के तहत वनमंडल के छह वन परिक्षेत्रों, 178 ग्रामों तथा 26 प्रमुख वृक्ष प्रजातियों के कुल 1,353 उल्लेखनीय वृक्षों का दस्तावेजीकरण किया गया है।

178 गांवों में हुआ व्यापक सर्वेक्षण

वन विभाग के मैदानी अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा व्यापक क्षेत्रीय सर्वेक्षण, स्थानीय जनज्ञान और स्थल निरीक्षण के आधार पर यह दस्तावेज तैयार किया गया। इसमें ऐसे वृक्षों को शामिल किया गया है, जो अपने असाधारण आकार, दीर्घायु, जैव विविधता संरक्षण में योगदान, धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व तथा स्थानीय इतिहास से जुड़ाव के कारण विशेष पहचान रखते हैं।

आम, महुआ, पीपल और बरगद का रहा प्रभुत्व

सर्वेक्षण में आम, महुआ, पीपल और बरगद जैसी प्रजातियों का सर्वाधिक प्रभुत्व पाया गया। अनेक वृक्ष ग्रामीण समुदायों के लिए पूजा स्थलों, ग्राम चौपालों तथा सामाजिक आयोजनों के प्रमुख केंद्र के रूप में दर्ज किए गए हैं। अध्ययन के दौरान 649 वृक्ष धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व से जुड़े पाए गए, जबकि 88 वृक्ष चमगादड़ों तथा 238 वृक्ष मधुमक्खियों के महत्वपूर्ण आवास के रूप में चिन्हित किए गए।

वनकर्मियों ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका

इस महत्वपूर्ण अभियान में वन विभाग के मैदानी अमले की विशेष भूमिका रही। श्रीमती रंजना नागर, श्री जगदीश अहिरवार, श्री उमाशंकर पाल, श्री उदयभान सिंह, श्री महेन्द्र अग्रहरी तथा श्री रावेन्द्र सिंह बागरी सहित अनेक वनकर्मियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में वृक्षों का सर्वेक्षण, मापन, फोटोग्राफी एवं स्थानीय जानकारी के संकलन में उल्लेखनीय योगदान दिया। उनके प्रयासों से दक्षिण पन्ना की प्राकृतिक धरोहर का एक व्यवस्थित और मूल्यवान अभिलेख तैयार हो सका।

जुरसिंहा का बरगद निकला सबसे विशाल वृक्ष

सर्वेक्षण में काल्दा परिक्षेत्र के जुरसिंहा ग्राम स्थित विशाल बरगद को वनमंडल का सबसे बड़ा वृक्ष दर्ज किया गया है, जिसकी परिधि लगभग 1,500 सेंटीमीटर मापी गई। दस्तावेज़ में ऐसे अनेक वृक्षों का भी उल्लेख है, जो स्थानीय जनश्रुतियों के अनुसार कई पीढ़ियों से ग्रामीण जीवन, संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण के साक्षी रहे हैं।

संरक्षण और जनजागरूकता बढ़ाने का उद्देश्य

वन विभाग के अनुसार इस पहल का उद्देश्य विशिष्ट वृक्षों के महत्व को व्यापक समाज तक पहुँचाना, उनके संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाना तथा भविष्य में इनके संरक्षण के लिए वैज्ञानिक और सामुदायिक प्रयासों को प्रोत्साहित करना है। यह दस्तावेज़ दक्षिण पन्ना की समृद्ध प्राकृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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