
जबलपुर। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर संस्कारधानी जबलपुर में विभिन्न धार्मिक एवं शैक्षणिक संस्थानों में गुरु पूजन, वंदन एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। बगलामुखी सिद्धपीठ शंकराचार्य मठ सिविक सेंटर मढ़ाताल, जी.एस. अर्थ वाणिज्य महाविद्यालय (स्वशासी) तथा श्रीजानकीरमण महाविद्यालय में आयोजित कार्यक्रमों में गुरु की महिमा, गुरु-शिष्य परंपरा, भारतीय ज्ञान परंपरा और जीवन में गुरु के महत्व पर वक्ताओं ने प्रकाश डाला।
श्रद्धा और समर्पण का पर्व है गुरु पूर्णिमा: ब्रह्मचारी चैतन्यानंद जी
गुरु पूर्णिमा व्यास-पूर्णिमा के पावन अवसर पर बगलामुखी सिद्धपीठ शंकराचार्य मठ, सिविक सेंटर मढ़ाताल, जबलपुर में गुरु पूर्णिमा महोत्सव श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। कार्यक्रम ब्रह्मचारी सुबुद्धानंद जी एवं ब्रह्मचारी चैतन्यानंद जी के सानिध्य में संपन्न हुआ।
ब्रह्मचारी चैतन्यानंद जी ने कहा कि शिष्य की निस्वार्थ निष्ठा और भगवान के प्रति समर्पण की समन्वयता ही गुरु दीक्षा है। गुरु वह शक्ति हैं, जो शिष्य को जीवन की सही दिशा दिखाते हैं और आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।
पूज्य ब्रह्मचारी जी ने सर्वप्रथम ब्रह्मलीन ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के श्रीचरणों में पादुका पूजन किया। गुरु महिमा का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा— “गुरु बिन भवनिधि तरई न कोई। जो बिरंचि शंकर सम होई।” उन्होंने कहा कि जीवन का आधार एवं सार केवल गुरु हैं।
कार्यक्रम में विधायक आचार्य राजेंद्र शास्त्री, भारत सिंह यादव, विनय सक्सेना, मधु यादव, श्रीमती नीता पटेल, बृजेश दुबे, गोविंद साहू, संजय गुरु, हेमंत मिश्रा, मनोज सेन आदि उपस्थित हुए।
जी.एस. महाविद्यालय में मनाया गया महर्षि संदीपनि गुरु श्रद्धा पर्व
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर जी.एस. अर्थ वाणिज्य महाविद्यालय (स्वशासी), जबलपुर में भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ द्वारा महर्षि संदीपनि गुरु श्रद्धा पर्व हर्ष और उल्लास के साथ मनाया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. अमरेंद्र पाण्डेय जी ने कहा कि गुरु वह शक्ति हैं जो गिरकर संभलना सिखाते हैं और मुश्किल राहों में भी आगे बढ़ना सिखाते हैं। उनके आशीष से जीवन में उजाला छाता है और हर कदम पर सफलता का फूल खिलता है।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता पंडित डॉ. राधिका प्रसाद मिश्र जी ने कहा कि हिंदू संस्कृति में गुरु का स्थान ईश्वर से भी ऊंचा माना गया है, क्योंकि गुरु ही जीवन जीने की सही दिशा और उद्देश्य समझाते हैं। गुरु पूर्णिमा का पर्व उन सभी गुरुओं के प्रति आभार व्यक्त करने का अवसर है, जिन्होंने अज्ञानता के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर अग्रसर किया।
उन्होंने कहा कि यह दिन केवल आध्यात्मिक गुरुओं के सम्मान का ही नहीं, बल्कि माता-पिता, शिक्षक और हर उस व्यक्ति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है, जिन्होंने जीवन में किसी न किसी रूप में हमें कुछ सिखाया है।
महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य डॉ. शिव कुमार व्यास जी ने कहा कि गुरु पूर्णिमा पर हम अपने गुरुओं के प्रति श्रद्धा, प्रेम और कृतज्ञता व्यक्त करते हैं तथा उनके आशीर्वाद से जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा लेते हैं।
कार्यक्रम के प्रारंभ में भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ के प्रभारी डॉ. नीरज कुमार केशरवानी ने गुरु पूर्णिमा के महत्व पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर डॉ. ज्ञानेन्द्र त्रिपाठी, उप प्राचार्य एवं वाणिज्य अधिष्ठाता डॉ. डी. बी. कोष्ठ ने भी अपने विचार रखे।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने महाविद्यालय के सभी प्राध्यापकगणों का शाल एवं श्रीफल देकर सम्मान किया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के सभी प्राध्यापक उपस्थित रहे। संचालन डॉ. सुनीता उपाध्याय ने किया।
श्रीजानकीरमण महाविद्यालय में गुरु परंपरा का किया स्मरण
श्रीजानकीरमण महाविद्यालय, जबलपुर में भी गुरु पूर्णिमा महोत्सव का गरिमामय आयोजन संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ ब्रह्मलीन दिपीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज एवं श्रीजानकीरमण महाविद्यालय के संस्थापक पं. हरिकृष्ण त्रिपाठी के तैल चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर पूजन-अर्चन के साथ किया गया।
कार्यक्रम में गुरु परंपरा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि गुरु पूर्णिमा के दिन गुरुजनों का पूजन-अर्चन कर उनसे सद्मार्ग पर चलने का आशीर्वाद प्राप्त करने की परंपरा रही है।
डॉ. अभिजात त्रिपाठी ने कहा कि गुरु पूर्णिमा महज एक दिन नहीं, बल्कि अपने गुरु के प्रति आदर और सम्मान का भाव सदैव बनाए रखने का संदेश देती है। गुरु के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता जीवनभर बनी रहनी चाहिए।
कार्यक्रम में डॉ. शक्ति सिंह मंडलोई, डॉ. गंगाधर त्रिपाठी, डॉ. कौशल दुबे, अभिमन्यु जैन, राजेश दुबे एवं शशिकांत तिवारी ने अपने विचार व्यक्त किए।
संपूर्ण कार्यक्रम का संयोजन एवं संचालन डॉ. आनंद सिंह राणा ने किया तथा आभार प्रदर्शन डॉ. अनामिका सिंह ने किया।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से डॉ. अनामिका सिंह, कंचन दुबे, राखी बाजपेई, श्रुति शुक्ला, मानसी गौतम, अर्पिता खरे, मुकेश श्रीवास्तव सहित छात्र-छात्राओं की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित इन कार्यक्रमों में गुरु-शिष्य परंपरा, भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक ज्ञान एवं संस्कारों के महत्व को रेखांकित किया गया। अलग-अलग आयोजनों में श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता के साथ गुरुजनों का स्मरण करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया गया।