तीज-चौथ पर विरह भाव, पंचमी पर भोग, मंगल आरती, वीतक कथा का शुभारंभ और विशाल भंडारा

राकेश कुमार शर्मा

पन्ना। श्री निजानंद संप्रदाय (प्रणामी) में श्रावण मास की तीज, चौथ एवं पंचमी का विशेष धार्मिक महत्व है। संप्रदाय की मान्यता के अनुसार इन पावन तिथियों पर संप्रदाय के प्रवर्तक महामति प्राणनाथ जी अंतर्ध्यान हुए थे। उनकी पावन स्मृति में देशभर के प्रणामी मंदिरों में तीन दिवसीय विशेष धार्मिक आयोजन श्रद्धा एवं भक्ति के साथ संपन्न किए जाते हैं।

तीज एवं चौथ पर विरह भाव से हुआ महामति प्राणनाथ जी का स्मरण

तीज एवं चौथ के दिन संपूर्ण वातावरण विरह भाव से ओत-प्रोत रहता है। सभी सुंदरसाथ सादगी के प्रतीक सफेद वस्त्र धारण कर बिरह के प्रकरण का गायन करते हैं। इन दोनों दिनों में मंदिरों में आरती के समय ढोलक, घंटे एवं अन्य वाद्य यंत्र नहीं बजाए जाते। श्रद्धालु व्रत रखकर श्री तारतम वाणी का पाठ, सत्संग के माध्यम से महामति प्राणनाथ जी का स्मरण करते हैं।

पंचमी पर भोग, मंगल आरती के साथ धार्मिक आयोजन

पंचमी के दिन विरह का भाव समाप्त होने के साथ ही श्रद्धालु सुंदरसाथ मंदिर में भगवान को भोग अर्पित करते हैं। इसके पश्चात परंपरानुसार ढोलक, घंटे-घड़ियाल और मंगल आरती के साथ नियमित पूजा-अर्चना संपन्न होती है। इसी शुभ अवसर पर विश्व प्रसिद्ध पन्ना धाम सहित देश-विदेश के सभी प्रणामी मंदिरों में एक माह तक चलने वाली वीतक कथा का विधिवत शुभारंभ होता है।

एक माह तक सुनाई जाती है संप्रदाय की गौरवगाथा

श्रावण मास में आयोजित होने वाली वीतक कथा पूरे एक माह तक प्रतिदिन होती है। इस कथा में विद्वान, विदुषी एवं आचार्य श्री निजानंद संप्रदाय का संपूर्ण इतिहास, महामति प्राणनाथ जी के जीवन, उनके आध्यात्मिक संदेश, धर्म प्रचार, मानवता, समरसता एवं संप्रदाय की गौरवशाली परंपराओं का विस्तार से वर्णन करते हैं। श्रद्धालु बड़ी संख्या में कथा श्रवण कर आध्यात्मिक ज्ञान एवं जीवन मूल्यों का लाभ प्राप्त करते हैं।

रात्रि में विशाल भंडारे का आयोजन

पंचमी की रात्रि लगभग 8 बजे से विशाल भंडारे का आयोजन श्री 108 श्री प्राणनाथ जी मंदिर ट्रस्ट के द्वारा किया जाता है, जिसमें पन्ना सहित विभिन्न राज्यों से आए हजारों श्रद्धालु एवं आमजन प्रसाद ग्रहण करते हैं। यह आयोजन सेवा, समर्पण, भाईचारे, आध्यात्मिक एकता एवं प्रणामी संप्रदाय की समृद्ध धार्मिक परंपरा का अनुपम प्रतीक माना जाता है।

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