टिटहरी के चार अंडों से अच्छी बारिश की लोकमान्यता, दक्षिण पन्ना में बढ़ी उत्सुकता

पन्ना। दक्षिण पन्ना वनमंडल की रैपुरा रेंज अंतर्गत भरतला बीट में एक झिरिया के पास टिटहरी (रेड-वॉटल्ड लैपविंग) के चार अंडे मिलने से क्षेत्र में उत्सुकता का माहौल है। हालांकि टिटहरी के अंडों की संख्या के आधार पर बारिश का अनुमान लगाने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है, फिर भी स्थानीय लोकमान्यता के चलते इसे अच्छी बारिश के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

 

दुर्लभ दृश्य बना चर्चा का विषय

सामान्यतः टिटहरी तीन अंडे देती है, जबकि चार अंडों का समूह कम ही देखने को मिलता है। खुले पथरीले एवं कंकरीले भूभाग पर बिना पारंपरिक घोंसले के दिए गए ये अंडे प्रकृति की अद्भुत अनुकूलन क्षमता को दर्शाते हैं, जिससे यह दृश्य लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

प्राकृतिक सुरक्षा का अनोखा तरीका

अंडों का रंग और बनावट आसपास की मिट्टी व पत्थरों में इस प्रकार घुलमिल जाती है कि उन्हें पहचान पाना कठिन हो जाता है। यही कारण है कि खुले स्थान पर होने के बावजूद इन्हें प्राकृतिक सुरक्षा मिल जाती है।

लोकमान्यता से जुड़ी बारिश की उम्मीद

ग्रामीणों के बीच लंबे समय से यह मान्यता प्रचलित है कि टिटहरी द्वारा दिए गए अंडों की संख्या आने वाले वर्ष में वर्षा के महीनों का संकेत देती है। स्थानीय विश्वास के अनुसार यदि चार अंडे हों तो अच्छी एवं लंबे समय तक बारिश होने की संभावना मानी जाती है। हालांकि इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है, फिर भी यह लोकज्ञान और प्रकृति अवलोकन की समृद्ध परंपरा को दर्शाता है।

वन विभाग ने बताया सकारात्मक संकेत

वन अधिकारियों के अनुसार ऐसे पारंपरिक दावों का व्यवस्थित अभिलेखन और दीर्घकालीन अध्ययन भविष्य में रोचक निष्कर्ष दे सकता है। दक्षिण पन्ना वनमंडल द्वारा जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत झिरियाओं के संरक्षण एवं पुनर्जीवन कार्यों से इन क्षेत्रों में पक्षियों और अन्य वन्य जीवों की गतिविधियों में वृद्धि देखी जा रही है।

झिरिया पुनर्जीवन से बढ़ी वन्य गतिविधियां

झिरिया पुनर्जीवन का कार्य वन रक्षक एवं बीट प्रभारी रजनीश चौरसिया द्वारा कराया गया है। टिटहरी जैसे संवेदनशील पक्षियों की उपस्थिति यह संकेत देती है कि प्राकृतिक आवास और जलस्रोत पुनः जीवंत हो रहे हैं।

रिपोर्ट: राकेश कुमार शर्मा 

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