
बेंगलुरु/जबलपुर। अखिल भारतीय विद्युत अभियंता महासंघ (AIPEF) की फेडरल एग्जीक्यूटिव की बैठक 12 जून 2026 को बेंगलुरु में आयोजित हुई, जिसमें देशभर के विद्युत क्षेत्र में निजीकरण और सार्वजनिक उपक्रमों के विखंडन से जुड़ी नीतियों पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई। बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए और सार्वजनिक स्वामित्व तथा उपभोक्ता हितों की रक्षा के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई गई।
बैठक की अध्यक्षता महासंघ के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने की। इस दौरान महासचिव पी. रत्नाकर राव, केईबी इंजीनियर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बसवन्ना और महासचिव चंद्रशेखर देसाई सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे।
AIPEF ने प्रस्तावित विद्युत (संशोधन) विधेयक 2025 का कड़ा विरोध करते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की। महासंघ का कहना है कि यह विधेयक एक ही क्षेत्र में कई वितरण लाइसेंसधारियों को अनुमति देकर निजीकरण को बढ़ावा देगा, जिससे सार्वजनिक डिस्कॉम कमजोर होंगे और उपभोक्ताओं तथा किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा।
बैठक में कर्नाटक में समानांतर वितरण लाइसेंस देने के प्रस्ताव, हरियाणा में निजी कंपनियों को वितरण लाइसेंस देने के प्रयासों और विभिन्न राज्यों में अलग कृषि डिस्कॉम बनाने की योजनाओं का भी विरोध किया गया। महासंघ ने इसे सार्वजनिक वितरण व्यवस्था के लिए हानिकारक बताया।
AIPEF ने आंध्र प्रदेश में एआई डेटा सेंटर को डीम्ड डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंस देने के प्रस्ताव को भेदभावपूर्ण बताते हुए इसका विरोध किया। साथ ही लद्दाख पावर डेवलपमेंट डिपार्टमेंट के निगमकरण के प्रस्ताव पर भी आपत्ति जताई गई।
महासंघ ने उत्तर प्रदेश में विद्युत वितरण कंपनियों के निजीकरण के खिलाफ चल रहे आंदोलन का समर्थन करते हुए चेतावनी दी कि यदि कर्मचारियों पर दमन जारी रहा तो देशव्यापी आंदोलन किया जाएगा।
बैठक में देशभर के विद्युत कर्मचारियों और अभियंताओं के लिए पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल करने की मांग भी उठाई गई। महासंघ ने कहा कि पेंशन कर्मचारियों का अधिकार है और उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद सुरक्षित जीवन मिलना चाहिए।
बैठक में मध्यप्रदेश विद्युत मंडल अभियंता संघ के महासचिव विकास शुक्ला और प्रचार सचिव नरेंद्र चंदेल भी शामिल हुए। विकास शुक्ला ने कहा कि निजीकरण के खिलाफ सभी राज्यों के साथ मिलकर निर्णायक संघर्ष किया जाएगा।
बैठक में देश के 21 राज्यों और विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। महासंघ ने स्पष्ट किया कि बिजली एक आवश्यक सार्वजनिक सेवा है और इसके निजीकरण का विरोध जारी रहेगा।