
राजीव उपाध्याय
मध्यप्रदेश कांग्रेस में अंतर्विरोध वक्त के साथ बढ़ता ही जा रहा है। भाजपा जिस तरह से मजबूत हो रही है उसे देखकर भी कांग्रेस के नेता नहीं सीख रहे हैं। उनकी अंतर्कलह जनता के सामने उजागर हो रही है और जनता भी यह सोचने मजबूर हो जाती है कि जिस पार्टी के नेताओं में ही एकता नहीं है, वह जनता के दर्द को कैसे समझेगी। पिछले दिनों की घटनाओं ने यह साबित भी कर दिया है।
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव पर उज्जैन में जमीन से जुड़े मामलों पर मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाए। इसके लिए बकायदा दिल्ली में प्रेस कांफ्रेंस भी की लेकिन वहीं इन आरोपों को पूर्व राज्यसभा सांसद व प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने एक सिरे से खारिज कर दिया। अजब बात यह है कि कांग्रेस जहां एक ओर इस मामले को लेकर बड़ा मुद्दा बनाना चाह रही थी वहीं इस मुद्दे की हवा खुद उनके नेता ने निकाल दी।
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने यह भी दावा कर दिया कि “वे बिना रिसर्च के कोई बात नहीं करते। भारत न्यास निजी नहीं, बल्कि सरकारी है। इसलिए उसे जमीन देना गलत नहीं है। जब कांग्रेस की सरकार थी तब तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ भी ट्रस्ट के प्रमुख थे।” दिग्विजय सिंह के बेबाक बयान कभी-कभी कांग्रेस को मुसीबत में डाल देते हैं। वैसे कुछ समय से दिग्विजय सिंह और प्रदेश कांग्रेस संगठन के बीच समन्वय नहीं बन रहा है।
मध्यप्रदेश कोटे से राज्यसभा सीट के लिए जब मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द हुआ था तब भोपाल में कांग्रेस की प्रेस कांफ्रेंस में दिग्विजय सिंह और प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी के बीच तल्खी सबने देखी। उस वक्त प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने दिग्विजय सिंह को प्रेस को संबोधित करने कहा था तब उन्होंने मना कर दिया। इसके पहले भी दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी के बीच शीत युद्ध होता रहा है।
दिग्विजय सिंह के इस बयान के बाद प्रदेश कांग्रेस की किरकिरी हो गई है। कांग्रेस के हाथ से एक मुद्दा निकल गया है। इंडिया गठबंधन में कांग्रेस की पार्टनर समाजपार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जमीन घोटाले वाले मामले में मोहन यादव का पक्ष लेते हुए इसे पिछड़े वर्ग का मुद्दा बना दिया था। अखिलेश यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री पिछड़ा वर्ग से आते हैं इसलिए भाजपा ने उन्हें पद से हटाने के लिए यह चाल चली है। सपा ने यहां मध्यप्रदेश कांग्रेस की मुद्दे की हवा निकाल दी और पिछड़े वर्ग को मुद्दा बना दिया।
वहीं अब यादव समाज प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के विरोध में सड़क पर उतर आया है। इस घटनाक्रम में प्रदेश कांग्रेस संगठन ने यादव समाज को अपने से दूर कर लिया। प्रदेश कांग्रेस को कमजोर करने के लिए भाजपा की जरूरत ही नहीं पड़ी। खुद कांग्रेस ने ही उसकी जड़ों में मठा डालकर उसे कमजोर कर दिया।
कांग्रेस हमेशा से ही क्षत्रपों की पार्टी रही है। यह आदत अभी तक बरकरार है। कांग्रेस में क्षत्रप अपना वर्चस्व खोना नहीं चाहते। जब ऐसा लगता है कि कोई अन्य उनको साइड लाइन कर रहा है तो शतरंज की ढाई चाल इस तरह से वे चलते हैं कि मात खाने वाला भी भौचक्क रह जाता है। राहुल गांधी कांग्रेस से जैन-जी को जोड़ने का लगातार प्रयास कर रहे हैं। कोटा में वे छात्रों से मिले अब प्रयागराज में जैन-जी से मिलेंगे। युवा वर्ग को कांग्रेस से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन कांग्रेस के अन्य बड़े नेताओं ने कभी किसी वर्ग को जोड़ने कोई अभियान नहीं चलाया।
कांग्रेस की सत्ता जब से मध्यप्रदेश के हाथ से निकली है पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ कभी जनता के बीच नहीं गए। वहीं दिग्विजय सिंह का अपना गुट तो पहले से ही है। इन अंतर्विरोध से कांग्रेस अब तक प्रदेश में मजबूत नहीं हो सकी है। प्रदेश में 2028 में विधानसभा चुनाव हैं। अभी तक कांग्रेस के पास सीएम पद के लिए कोई नया फेस नहीं है। जिसकी दम पर कांग्रेस जनता के बीच जा सके, क्योंकि जो सीएम फेस बनना भी चाह रहा है उसकी हवा उनके ही नेता निकाल रहे हैं।