
जबलपुर। हिन्दुस्तान हिन्दूओं का है किसी की भी जागीर नहीं है। मां भारती समृद्ध और शक्तिशाली है। वीर सावरकर को हम अपने बुध्दि विवेक से नहीं नाप सकते, वो एक विलक्षण प्रतिभा थे। जीवन भर मां भारती के लिए समर्पित होकर उन्होंने अपने विचारों और भावनाओं से जन-जन को जागरूक किया।
उन्होंने अंतिम क्षणों तक अपने परिवार को समय ना देकर विकसित और अखंड भारत की परिकल्पना को साकार करने का स्वप्न संजोए रखा तथा सामाजिक समरसता का भाव जागृत किया।

शताब्दी सभागार में आयोजित हुआ जयंती समारोह
उक्त उद्गार महाराष्ट्र शिक्षण मंडल, जबलपुर द्वारा शताब्दी सभागार महाकौशल स्कूल गोलबाजार में स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर जी के जयंती समारोह में मुख्य वक्ता चिंतक विचारक सुधीर पाठक ने व्यक्त किए।

‘शत दीप’ स्मारिका का हुआ विमोचन
कार्यक्रम के दौरान महाराष्ट्र शिक्षण मंडल की शताब्दी के उपलक्ष्य में स्मारिका “शत दीप” द्वितीय आवृत्ति का विमोचन भी किया गया।
नागपुर से आए वक्ता ने रखे विचार
नागपुर से पधारे सुविख्यात सावरकर विचारक, अभ्यासक, चिंतक तथा पूर्व प्रधान संपादक तरुण भारत समूह, सुधीर पाठक (लोकमान्य तिलक पत्रकारिता पुरस्कार तथा सावरकर प्रतिष्ठान से सम्मानित) ने अपने विचार प्रस्तुत किए।
बड़ी संख्या में गणमान्य लोग रहे उपस्थित
विचार गोष्ठी में मुख्य अतिथि भारतेंदु कुमार सिंह, निदेशक भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी डिजाइन तथा विनिर्माण संस्थान जबलपुर, अध्यक्षता डॉ जितेन्द्र जामदार ने की। इस अवसर पर प्रशांत पोल, अजय भालेराव, उदय परांजपे, प्रमोद पाठक, पार्षद प्रतिभा भापकर, पार्षद अर्चना सिसौदिया, अविनाश हलबे, अनिल राजुरकर, श्रीमती सारिका ठोसर, मोहिनी मोघे, अनिल मोघे, राहुल उज्जैनकर, नितिन उपाध्ये, अभय गोरे, डॉ शिरीष जामदार, मनोज पांडेय, प्रवीण विप्रदास, श्रीपाद कायदें, संजय दुल्हानी, सुरेश मुंजे, विध्येश भापकर सहित बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित थे।